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तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही सेना में बड़ा फेरबदल, वीडियो में जानें कई अहम पदों पर नई नियुक्तियां

 

बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के बाद सेना में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पद संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर सेना के ऑपरेशनल और इंटेलिजेंस ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां और पदोन्नतियां की हैं। रविवार को जारी आधिकारिक आदेशों में इन बदलावों की जानकारी दी गई।

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जारी आदेश के अनुसार, भारत में रक्षा सलाहकार के पद पर तैनात ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को पदोन्नत कर मेजर जनरल बनाया गया है। पदोन्नति के साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस ढाका बुलाया गया है। सरकार ने उन्हें सेना की महत्वपूर्ण 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) नियुक्त किया है। यह डिविजन सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसकी जिम्मेदारी सीमाई सुरक्षा और रणनीतिक ऑपरेशनों से जुड़ी होती है।

इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का नया चीफ ऑफ जनरल स्टाफ नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के प्रमुख के रूप में सेवाएं दे रहे थे और सैन्य प्रशिक्षण और रणनीतिक सिद्धांतों के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्हें एक अनुभवी और पेशेवर सैन्य अधिकारी माना जाता है।

मुहम्मद मैनूर रहमान ने लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम की जगह ली है। शमीम को हाल ही में रिटायरमेंट लीव पर भेज दिया गया था, जिसके बाद यह पद खाली हो गया था। सरकार ने इस महत्वपूर्ण पद पर मैनूर रहमान की नियुक्ति कर सेना के नेतृत्व में नई दिशा देने का संकेत दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान का यह कदम सेना के नेतृत्व में अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को लागू करने की दिशा में एक अहम पहल है। सेना में ऑपरेशनल और इंटेलिजेंस स्तर पर किए गए ये बदलाव भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नई सरकार आमतौर पर सेना और सुरक्षा एजेंसियों में भरोसेमंद और सक्षम अधिकारियों को प्रमुख पदों पर नियुक्त करती है, ताकि सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। ऐसे में यह फेरबदल प्रशासनिक और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश की राजनीति में हाल ही में हुए बदलावों के बाद सरकार और सेना के बीच समन्वय को मजबूत करना प्राथमिकता माना जा रहा है। इस फेरबदल को उसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम माना जा रहा है।

आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर बांग्लादेश की सैन्य रणनीति, सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल, इन बदलावों के बाद सेना के भीतर नई जिम्मेदारियों के साथ अधिकारियों ने अपना कार्यभार संभालना शुरू कर दिया है।