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ब्राजील में लूला दा सिल्वा की चौथी जीत! पहले राउंड में पिछड़े, दूसरे में पलटा पासा; वीडियो में जाने ट्रम्प समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया

 

ब्राजील की राजनीति में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की जीत को लेकर बड़ा दावा किया गया है। दिए गए विवरण के मुताबिक, लूला ने राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया। पहले दौर में पिछड़ने के बाद लूला ने दूसरे दौर में बाजी पलट दी। हालांकि, इस चुनाव और इसके नतीजों से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

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लूला दा सिल्वा इससे पहले 2022 के चुनाव में फ्लावियो के पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हरा चुके हैं। इस बार भी बोल्सोनारो परिवार से जुड़े उम्मीदवार के साथ उनका मुकाबला बताया गया है। चुनाव के पहले दौर में फ्लावियो को 47 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 45 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इसके बावजूद दूसरे दौर में चुनावी समीकरण बदलने की बात कही गई है।

पहले दौर में पिछड़ने के बाद कैसे बदला चुनावी समीकरण?

ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के तहत यदि किसी उम्मीदवार को पहले दौर में जरूरी बहुमत नहीं मिलता, तो शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर में मुकाबला होता है। ऐसी स्थिति में पहले दौर में बाहर हुए उम्मीदवारों के समर्थक दूसरे दौर में किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।इसी वजह से दूसरे दौर में वोटों का समीकरण बदल सकता है। दिए गए विवरण के अनुसार, पहले दौर में फ्लावियो को बढ़त मिली थी, लेकिन दूसरे दौर में लूला ने अधिक समर्थन हासिल कर लिया। हालांकि, चुनाव के आधिकारिक नतीजों और वोट प्रतिशत की पुष्टि के लिए संबंधित चुनाव प्राधिकरण के आंकड़े जरूरी हैं।

1989 के बाद चुनावी इतिहास में बदलाव का दावा

ब्राजील में 1989 से सीधे राष्ट्रपति चुनाव होने लगे थे। दिए गए विवरण में दावा किया गया है कि उसके बाद पहली बार ऐसा हुआ कि पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अंतिम दौर में जीतकर राष्ट्रपति बना।दूसरे दौर में उम्मीदवारों की जीत केवल पहले चरण के वोट प्रतिशत पर निर्भर नहीं करती। इसमें बाहर हुए उम्मीदवारों के समर्थकों का रुख, मतदाताओं की प्राथमिकताएं और चुनावी मुद्दे अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए पहले दौर में मिली बढ़त अंतिम जीत की गारंटी नहीं होती।

महिलाओं और कैथोलिक मतदाताओं के समर्थन का जिक्र

चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों के हवाले से बताया गया कि महिलाओं के बीच लूला को 49 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि फ्लावियो को 40 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन प्राप्त था। इसी तरह कैथोलिक मतदाताओं में लूला को 52 प्रतिशत और फ्लावियो को 42 प्रतिशत समर्थन मिलने का दावा किया गया।यदि ये आंकड़े संबंधित सर्वेक्षणों के अनुरूप हैं, तो वे दोनों उम्मीदवारों के बीच मतदाताओं की प्राथमिकताओं को समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, सर्वेक्षणों के नतीजे और वास्तविक मतदान के परिणाम अलग हो सकते हैं। सर्वेक्षण के नमूने, समय और पद्धति की जानकारी के बिना इन आंकड़ों से पूरे मतदाता वर्ग के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

अमेरिका के दबाव के बीच देश की स्वतंत्रता पर जोर

दिए गए विवरण के अनुसार, लूला ने कहा कि ब्राजील को अपने फैसले खुद लेने चाहिए। उन्होंने अमेरिका के दबाव के बीच देश की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया। इस रुख को भी मतदाताओं के समर्थन से जोड़कर देखा गया है।ब्राजील की विदेश नीति, आर्थिक हित और अमेरिका के साथ संबंध राष्ट्रपति चुनाव में महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं। हालांकि, मतदाताओं ने किस कारण से किसी उम्मीदवार को वोट दिया, इसका आकलन करने के लिए विश्वसनीय चुनावी सर्वेक्षण और अन्य प्रमाणों की जरूरत होती है।