रूसी तेल पर ट्रंप के 100% टैरिफ को लेकर बोले जेमी डिमोन, ‘भारत और ग्लोबल ऑयल मार्केट को सजा न मिले’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून पर भारत समेत कई देशों की नजर बनी हुई है। 18 सितंबर 2026 को ट्रंप ने ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर किए। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों के सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, यह टैरिफ अपने आप लागू नहीं होता, बल्कि अमेरिकी प्रशासन के फैसले पर निर्भर करेगा।
भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों के लिए इस कानून को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच JPMorgan Chase के CEO जेमी डिमोन ने रूसी तेल को लेकर अमेरिकी नीति पर अपनी राय रखी है। मुंबई में आयोजित JPMorgan India Investor Conference के दौरान डिमोन ने कहा कि अमेरिका को रूस पर दबाव बनाने के साथ-साथ भारत और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना चाहिए।
तेल पर टैरिफ लगाने के पक्ष में नहीं डिमोन
जेमी डिमोन ने रूसी तेल पर टैरिफ लगाने के विचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका को इस मामले में सावधानी बरतनी चाहिए। उनके मुताबिक, रूस का मुकाबला करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन इसका असर भारत और दुनिया के तेल बाजार पर नहीं पड़ना चाहिए।
डिमोन ने यह भी कहा कि अमेरिका यूक्रेन की मदद के लिए दूसरे कदम उठा सकता है। उन्होंने रूस के खिलाफ दबाव बनाने की जरूरत से इनकार नहीं किया, लेकिन तेल पर टैरिफ को इसका उचित तरीका मानने पर असहमति जताई।
भारतीय रिफाइनरियों की जरूरतों का दिया हवाला
डिमोन ने भारत की रिफाइनिंग व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि अलग-अलग रिफाइनरियों को कच्चे तेल की अलग-अलग गुणवत्ता और ग्रेड की जरूरत होती है। अगर भारत रूस से मिलने वाला कच्चा तेल खरीदना बंद करता है, तो उसे दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा और जरूरी नहीं कि उपलब्ध दूसरा क्रूड हर रिफाइनरी के लिए उपयुक्त हो।
उनके मुताबिक, इसलिए सिर्फ तेल के स्रोत को देखकर फैसला लेने के बजाय अमेरिका को यह समझना चाहिए कि भारत उस कच्चे तेल का इस्तेमाल किस तरह करता है और इसका व्यापक तेल बाजार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
100% टैरिफ का प्रावधान, लेकिन फैसला अभी बाकी
नए अमेरिकी कानून में रूस के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था है। कानून में कुछ परिस्थितियों में छूट और टैरिफ की दर में बदलाव के प्रावधान भी हैं। अमेरिकी प्रशासन को समय-समय पर यह तय करना होगा कि रूस के तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदार कौन हैं।
भारत इस कानून के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सरकार कानून और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच कर रही है।
ऐसे समय में जेमी डिमोन की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने अमेरिकी नीति के संभावित असर को केवल रूस-अमेरिका संबंधों तक सीमित न रखते हुए भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल बाजार के संदर्भ में देखने की बात कही है। उनका जोर इस बात पर है कि रूस पर दबाव बनाने के प्रयास में भारत और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर अनपेक्षित असर न पड़े।