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Italy Burqa Ban: स्कूलों में बुर्का-नकाब पर रोक की तैयारी, विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित
 

 

इटली में स्कूलों को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी सरकार नई व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है. मेलोनी ने रविवार को घोषणा की कि स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने के साथ-साथ प्रत्येक कक्षा में विदेशी छात्रों की संख्या की सीमा तय करने के लिए जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा.
यह घोषणा रोम में मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के कार्यक्रम में हुई. प्रस्ताव में उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा सीखने की व्यवस्था भी शामिल है, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में गंभीर रूप से घुलने-मिलने की समस्या है.
अभी तय नहीं हुई विदेशी छात्रों की सीमा
सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि एक कक्षा में अधिकतम कितने विदेशी छात्रों को पढ़ने की अनुमति होगी. मेलोनी ने कहा है कि इस संबंध में कानूनी सीमा तय की जाएगी.
इटली में गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्रों की संख्या पहले से ही काफी बड़ी है. Fondazione ISMU के 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के स्कूलों में 9,31,323 ऐसे छात्र हैं, जो कुल स्कूली आबादी का 11.6 फीसदी हैं.
9.3 लाख से ज्यादा विदेशी नागरिकता वाले छात्र
ISMU के आंकड़ों के अनुसार, गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्रों की हिस्सेदारी प्राथमिक स्कूलों में 13.7 फीसदी, प्री-स्कूल में 12.7 फीसदी और मिडिल स्कूल स्तर पर 12.6 फीसदी है. हाई स्कूल में यह अनुपात 8.6 फीसदी है.
इन छात्रों की संख्या देश के अलग-अलग हिस्सों में समान नहीं है. उत्तरी इटली में इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक है और अकेले लोम्बार्डी में कुल गैर-इतालवी छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पढ़ता है.


माता-पिता को सीखनी होगी इटैलियन भाषा
प्रस्तावित नियमों में भाषा और स्कूल में एकीकरण पर भी जोर दिया गया है. जिन विदेशी छात्रों को शिक्षा व्यवस्था में गंभीर स्तर पर एकीकरण संबंधी दिक्कतें हैं, उनके माता-पिता को इटैलियन भाषा सीखने की बाध्यता का प्रावधान किया जा सकता है.
सरकार का कहना है कि भाषा की जानकारी बच्चों के स्कूल और समाज में बेहतर एकीकरण में भूमिका निभा सकती है.
बुर्का और नकाब पर प्रस्तावित रोक
मेलोनी ने विशेष रूप से बुर्का और नकाब पर स्कूलों में रोक लगाने की बात कही है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव अभी सरकार के स्तर पर लाया जाना है और उसके बाद कानून बनने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
यहां बुर्का और नकाब को हिजाब से अलग समझना जरूरी है. बुर्का और नकाब चेहरे को ढकते हैं, जबकि हिजाब आमतौर पर सिर और बालों को ढकता है. ताजा रिपोर्टों में इस प्रस्ताव को मुख्य रूप से चेहरे को ढकने वाले परिधानों यानी बुर्का और नकाब से जोड़ा गया है.
कानून बनने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी
सरकार की ओर से प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इसे कानून का रूप देने के लिए संसद की प्रक्रिया से गुजरना होगा. रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को 60 दिनों के भीतर संसद से पारित कराना होगा.
इसलिए फिलहाल इसे लागू कानून के बजाय प्रस्तावित नियम के तौर पर देखना जरूरी है.


यूरोप में पहले भी हो चुके हैं ऐसे फैसले
यूरोप के कुछ देशों में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को ढकने वाले परिधानों को लेकर पहले से नियम लागू हैं. फ्रांस और बेल्जियम में ऐसे प्रतिबंधों को लेकर यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के सामने मामले भी पहुंचे हैं.
इन मामलों में अदालत ने सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच संपर्क और सामाजिक मेलजोल जैसे आधारों पर लगाए गए प्रतिबंधों को कुछ परिस्थितियों में बरकरार रखा था. वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने ऐसे प्रतिबंधों को लेकर धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं.
विदेशी कामगारों की भूमिका भी अहम
इटली की अर्थव्यवस्था में विदेशी नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. खासकर कृषि, निर्माण और बुजुर्गों की देखभाल जैसे क्षेत्रों में विदेशी कामगार बड़ी संख्या में काम करते हैं.
इसलिए इटली में प्रवासन और एकीकरण से जुड़े किसी भी नए नियम का असर केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहता. शिक्षा, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े मुद्दे भी इस व्यापक बहस का हिस्सा हैं.
फिलहाल मेलोनी सरकार के प्रस्ताव का अगला चरण कैबिनेट में इसकी औपचारिक प्रस्तुति और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया है. विदेशी छात्रों की वास्तविक सीमा और नियमों का अंतिम स्वरूप आगे स्पष्ट होगा.