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'नहीं सुधरा PAK....अफगानिस्तान में फिर बरसाए बम'! 13 लोगों की मौत के बाद अफगानिस्तान ने खोली सच्चाई 

 

पाकिस्तान ने एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान में हवाई हमले किए हैं, जिनमें 13 लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इन हवाई हमलों में अफ़ग़ानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों को निशाना बनाया गया।

मरने वालों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति शामिल थे। पाकिस्तान ने अभी तक इन हमलों की बात स्वीकार नहीं की है। हमलों की गंभीरता या उनके पीछे के खास मकसद के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं मिली। पाकिस्तान का यह ताज़ा हमला दोनों देशों के बीच महीनों से चल रहे तनाव के बाद हुआ है। गौरतलब है कि फरवरी के आखिर से अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में कई हमले हुए हैं, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं, हालांकि चीन की मध्यस्थता से कुछ समय के लिए संघर्ष-विराम (सीज़फायर) लागू किया गया था।

**हामिद करज़ई ने क्या कहा**

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरा दुख और एकजुटता ज़ाहिर करते हुए, पूर्व राष्ट्रपति ने दोहराया कि पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी गलत नीतियों और दुश्मनी भरे कामों का नतीजा भुगत रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान को यह समझने की ज़रूरत है कि इन नीतियों को जारी रखने से उसे अपने मकसद हासिल नहीं होंगे। पाकिस्तान के हित में यही है कि वह अफ़ग़ानिस्तान के प्रति युद्ध और तबाही की नीति छोड़ दे और इसके बजाय एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहने का रास्ता चुने। 27 अप्रैल को अफ़ग़ानिस्तान पर पाकिस्तान के हमले से ही संघर्ष-विराम खतरे में पड़ गया था; उस हमले में कम से कम सात लोग मारे गए थे और 85 घायल हुए थे। उन हमलों में एक यूनिवर्सिटी और आम नागरिकों वाले इलाकों को निशाना बनाया गया था।

**एक-दूसरे पर आरोप**

गौरतलब है कि पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि चरमपंथी - खासकर पाकिस्तानी तालिबान (जिसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान या TTP के नाम से भी जाना जाता है) - अफ़ग़ानिस्तान में पनाह लेते हैं और फिर वहीं से पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं। हालांकि TTP अफ़ग़ान तालिबान से अलग है, लेकिन दोनों गुटों के बीच गहरे संबंध हैं। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार ने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए इन आरोपों को हमेशा नकारा है। असल में, 2021 में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सत्ता में है। जब से अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सत्ता में आया है, तब से पड़ोसी पाकिस्तान के साथ रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं।