इजराइली Ad Tech कंपनी की बड़ी साज़िश: बिना क्लिक डिवाइस हैक, UN और NATO भी आए चपेट में
मोबाइल और कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले लोगों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। टोरंटो यूनिवर्सिटी की सिटिजन लैब की जांच के मुताबिक, इजराइल की कंपनी डिस्कवर टेक से जुड़े विज्ञापनों के जरिए डिवाइस में जासूसी करने वाला मालवेयर पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मामले की सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ मामलों में यूजर को विज्ञापन पर क्लिक करने की जरूरत भी नहीं थी।
जांच में 1.20 लाख से ज्यादा वेबसाइटों और 75 हजार से अधिक ऐप से जुड़े विज्ञापन रिकॉर्ड सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन विज्ञापनों का दायरा आम वेबसाइटों और मोबाइल ऐप तक ही सीमित नहीं था। संयुक्त राष्ट्र (UN), नाटो और कई सरकारी संस्थानों के नेटवर्क तक भी ऐसे विज्ञापन पहुंचने की बात सामने आई है।भारत में इस्तेमाल होने वाले Truecaller, MX Player और Ludo Star जैसे ऐप के नाम भी जांच से जुड़े रिकॉर्ड में शामिल बताए गए हैं। हालांकि, किसी ऐप के विज्ञापन रिकॉर्ड में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि उस ऐप ने खुद जासूसी की या उसके सभी यूजर्स के फोन हैक हो गए।
क्या था पूरा जासूसी नेटवर्क?
सिटिजन लैब की जांच में विज्ञापन तकनीक के दुरुपयोग से जुड़े ऐसे तरीके सामने आए, जिनका इस्तेमाल चुनिंदा मोबाइल और कंप्यूटर को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता था। सामान्य तौर पर ऑनलाइन विज्ञापन कंपनियां यूजर्स तक विज्ञापन पहुंचाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। लेकिन जांच के मुताबिक, इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करके डिवाइस की जानकारी जुटाने और संभावित रूप से जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने की कोशिश की गई।
रिपोर्ट में 'डार्क कार्टोग्राफर' नाम के एक अन्य समूह का भी जिक्र है। इस समूह पर विज्ञापनों के माध्यम से 30 से ज्यादा देशों में लोगों के मोबाइल नंबर का पता लगाने की कोशिश करने का आरोप है।
6 पॉइंट में समझें, विज्ञापनों से कैसे हो सकती थी जासूसी?
1. सामान्य विज्ञापनों को बनाया गया जरिया
जांच के मुताबिक, संदिग्ध गतिविधियों के लिए सामान्य दिखने वाले ऑनलाइन विज्ञापनों का इस्तेमाल किया गया। यूजर जब किसी वेबसाइट या ऐप पर जाता है, तो वहां विज्ञापन अपने आप लोड हो सकते हैं।
कुछ मामलों में विज्ञापन पर क्लिक किए बिना भी उसके साथ जुड़ा कोड डिवाइस तक पहुंच सकता है। हालांकि, कोड का लोड होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि डिवाइस हैक हो गया या उसमें जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो गया।
2. डिवाइस और यूजर की जानकारी जुटाने की कोशिश
विज्ञापन तकनीक के जरिए डिवाइस और उसके इस्तेमाल से जुड़ी कुछ जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। इनमें डिवाइस की तकनीकी पहचान, आईपी एड्रेस या यूजर द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ऐप और वेबसाइट से जुड़े संकेत शामिल हो सकते हैं।
ऐसी जानकारी का इस्तेमाल संभावित लक्ष्यों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। इससे विज्ञापन नेटवर्क को अलग-अलग डिवाइस के बीच अंतर करने और चुनिंदा यूजर्स पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल सकती है।
3. चुनिंदा डिवाइस तक मालवेयर पहुंचाने की कोशिश
जांच में सामने आए तरीके के मुताबिक, पहले जुटाई गई जानकारी के आधार पर कुछ डिवाइस को निशाना बनाने की कोशिश की जा सकती थी। इसके बाद विज्ञापन से जुड़ी तकनीक के जरिए उन डिवाइस तक जासूसी सॉफ्टवेयर पहुंचाने का प्रयास किया जाता था।
इस तरह की गतिविधि को गंभीर साइबर सुरक्षा खतरा माना जाता है, क्योंकि यूजर को सामान्य विज्ञापन दिखाई दे सकता है, जबकि उसके पीछे चल रही तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी उसे नहीं होती। हालांकि, हर संदिग्ध विज्ञापन से मालवेयर इंस्टॉल हुआ हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
4. 161 देशों तक पहुंचा विज्ञापन नेटवर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक से जुड़ी विज्ञापन गतिविधियों का दायरा 161 देशों तक फैला हुआ था। जांचकर्ताओं को कंपनी के एक सर्वर पर जनवरी से जून 2026 के बीच 36.4 लाख से ज्यादा संभावित यूजर्स से जुड़े रिकॉर्ड मिले।
ये आंकड़े विज्ञापन नेटवर्क और संभावित लक्ष्यों से संबंधित रिकॉर्ड को दर्शाते हैं। इन्हें सीधे तौर पर हैक हुए मोबाइल फोन, संक्रमित कंप्यूटर या जासूसी के शिकार लोगों की संख्या नहीं माना जा सकता।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच सामने आए रिकॉर्ड से भी व्यापक हो सकती है।
5. जासूसी पकड़ना क्यों हो सकता था मुश्किल?
ऐसी गतिविधियों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि विज्ञापन सामान्य दिखाई देते हैं और उनके पीछे चलने वाली तकनीकी प्रक्रिया यूजर को नजर नहीं आती।
इसके अलावा, यदि अलग-अलग डिवाइस को अलग-अलग कोड या विज्ञापन दिखाए जाएं, तो सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए संदिग्ध गतिविधि को पहचानना और उसका विश्लेषण करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ विज्ञापन नेटवर्क, ऐप और वेबसाइटों की निगरानी के साथ-साथ डिवाइस की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
6. खुलासे के बाद Google ने क्या किया?
रिपोर्ट के मुताबिक, डिस्कवर टेक वर्ष 2020 से गूगल की प्रमाणित विज्ञापन कंपनियों की सूची में शामिल थी। सिटिजन लैब की जांच के बाद गूगल ने कंपनी को इस सूची से हटा दिया।
यह कार्रवाई विज्ञापन नेटवर्क की सुरक्षा और प्रमाणन व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। हालांकि, किसी कंपनी को प्रमाणित सूची से हटाने का अर्थ यह नहीं है कि उसके विज्ञापन देखने वाले सभी यूजर्स के डिवाइस संक्रमित हो गए थे।
BBC, न्यूयॉर्क टाइम्स और सरकारी नेटवर्क तक पहुंचे विज्ञापन
जांच में कई बड़ी मीडिया वेबसाइटों और संस्थानों के नेटवर्क पर संदिग्ध विज्ञापन दिखने के रिकॉर्ड भी सामने आए। इनमें BBC, न्यूयॉर्क टाइम्स, फॉक्स न्यूज, CBC और Yahoo जैसी वेबसाइटों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में अमेरिका के रक्षा विभाग, स्वीडन के सशस्त्र बलों और नॉर्वे की पुलिस के नेटवर्क तक विज्ञापन पहुंचने की बात भी सामने आई। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) से जुड़े नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया है।
कई देशों के सरकारी कार्यालयों और चुनावों की निगरानी करने वाली संस्थाओं के नेटवर्क तक ऐसे विज्ञापन पहुंचने के रिकॉर्ड मिलने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि, इन नेटवर्क पर विज्ञापन दिखाई देने और वहां मौजूद सिस्टम में सफलतापूर्वक सेंध लगने के बीच अंतर समझना जरूरी है।
भारतीय मोबाइल यूजर्स को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
इस खुलासे के बाद मोबाइल यूजर्स के लिए डिजिटल सुरक्षा पर ध्यान देना और भी जरूरी हो जाता है। केवल किसी विज्ञापन पर क्लिक न करना पर्याप्त सुरक्षा की गारंटी नहीं है, क्योंकि कुछ साइबर हमले विज्ञापन लोड होने या डिवाइस की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
सुरक्षा के लिए ये कदम अपनाएं:
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फोन अपडेट रखें: Android, iOS और कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम के सुरक्षा अपडेट समय पर इंस्टॉल करें।
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ऐप भरोसेमंद स्रोत से डाउनलोड करें: अनजान वेबसाइटों से APK या अन्य फाइलें डाउनलोड करने से बचें।
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संदिग्ध ऐप की परमिशन जांचें: कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन और अन्य संवेदनशील अनुमतियां केवल जरूरत के अनुसार दें।
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सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज न करें: फोन में संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा अलर्ट दिखाई देने पर उसकी जांच करें।
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अनजान लिंक और फाइलों से सावधान रहें: संदिग्ध वेबसाइटों पर निजी जानकारी दर्ज न करें और अनजान फाइलें इंस्टॉल न करें।
सबसे बड़ा सवाल: क्या आपके फोन की भी जासूसी हुई?
फिलहाल, इस जांच में सामने आए विज्ञापन रिकॉर्ड को सीधे तौर पर संक्रमित डिवाइस या प्रभावित यूजर्स की संख्या नहीं माना जा सकता। Truecaller, MX Player और Ludo Star जैसे ऐप का नाम रिकॉर्ड में होना भी अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उनके सभी यूजर्स की जासूसी हुई है।
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि ऑनलाइन विज्ञापन व्यवस्था का इस्तेमाल केवल प्रचार के लिए ही नहीं, बल्कि संभावित साइबर हमलों के माध्यम के रूप में भी किया जा सकता है। इसलिए ऐप और वेबसाइटों की सुरक्षा जांच, विज्ञापन नेटवर्क की जवाबदेही और यूजर्स के डिवाइस की सुरक्षा आज पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।