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ईरान की अमेरिका को दो टूक: एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम बाहर नहीं भेजेंगे, वीडियो में जाने 7 शर्तें पूरी होने तक बातचीत से इनकार

 

ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु विवाद और युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत पर सख्त रुख अपनाया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई ने मंगलवार को कहा कि उनका देश एक ग्राम भी एनरिच्ड यूरेनियम किसी दूसरे देश में नहीं भेजेगा। उन्होंने साफ किया कि जब तक अमेरिका भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी कहा कि अमेरिका को ईरान का भरोसा जीतने के लिए उसकी सात शर्तें पूरी करनी होंगी। 

एनरिच्ड यूरेनियम पर ईरान का सख्त रुख

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मोहसिन रजाई ने कहा कि ईरान का समृद्ध यूरेनियम देश की राष्ट्रीय संपत्ति है और इसे किसी दूसरे देश में भेजने का सवाल ही नहीं उठता। उनके मुताबिक, अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से पहले विश्वास बहाल करना जरूरी है।ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई भी पहले कह चुके हैं कि हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के करीब पहुंच चुके समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए।ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं, जबकि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता है। 

अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान की 7 शर्तें

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक अमेरिका ईरान की सात शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक उसका भरोसा जीतना संभव नहीं है। ये शर्तें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और क्षेत्र में जारी संघर्ष को खत्म करने से जुड़ी हैं।

ईरान की ओर से सामने रखी गई प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

ईरान ने सात शर्तों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि, अधिकारियों के बयानों में युद्ध समाप्त करने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अमेरिकी सैन्य दबाव खत्म करने जैसी मांगों का उल्लेख किया गया है। 

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्यों बढ़ा तनाव?

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। खाड़ी क्षेत्र से दुनिया के कई देशों तक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकते हैं।

ईरान ने संकेत दिया है कि उसकी शर्तें पूरी होने तक होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति नहीं बनेगी। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रतिबंध चाहता है।इस मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति मुश्किल बनी हुई है। पाकिस्तान समेत कुछ देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। 

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद हो गया है?

मोहसिन रजाई और मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के हालिया बयानों से स्पष्ट है कि ईरान फिलहाल अपनी शर्तों पर समझौता करने के पक्ष में है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका को पहले भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

वहीं, परमाणु कार्यक्रम पर दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर सख्त नियंत्रण चाहता है, जबकि ईरान अपने परमाणु भंडार को देश के भीतर रखने पर अड़ा है।ऐसे में दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना इस बात पर निर्भर करेगी कि वे परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर किस तरह सहमति बनाते हैं। फिलहाल, ईरान ने अपनी शर्तों को लेकर सख्त संदेश दिया है और बातचीत की अगली दिशा पर अनिश्चितता बनी हुई है।

  • ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जाए।
  • ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं।
  • क्षेत्र के सभी मोर्चों पर जारी लड़ाई रोकी जाए।
  • विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की संपत्तियों को मुक्त किया जाए।