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Iran US War: जॉर्डन से बहरीन तक अमेरिकी ठिकाने निशाने पर! ईरान के बड़े दावे, होर्मुज को लेकर भी बढ़ा तनाव
 

 


ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने जॉर्डन के अकाबा के पास मौजूद अमेरिकी मरीन कैंप को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी पक्ष ने हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

अमेरिकी मरीन कैंप पर मिसाइल हमले का दावा

IRGC के मुताबिक, अमेरिकी मरीन कैंप टिटिन पर बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस हमले में कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा।

ईरानी पक्ष ने कुछ अमेरिकी हमलावर हेलीकॉप्टरों के नष्ट होने का भी दावा किया है। हालांकि, इस नुकसान की पुष्टि स्वतंत्र स्रोतों से नहीं हो सकी है।

बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन अटैक की खबर

ईरानी मीडिया ने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले का भी दावा किया है। हालांकि, इस हमले की भी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

इसी बीच अमेरिका का कहना है कि उसकी सेना ईरान में उन सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है, जिन पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित करने की कोशिशों से जुड़े होने का आरोप है।

ईरानी मीडिया ने असालुयेह, जिरोफ्ट, बंदर अब्बास, किश द्वीप, कोनारक, चाबहार, जास्क, सिरिक और लावान सहित कई इलाकों में धमाकों की खबरें दी हैं।

होर्मुज को लेकर ईरान का सख्त रुख

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर ईरान का नियंत्रण है।

गालिबाफ ने कहा कि पहले हर 24 घंटे में कम से कम 120 जहाज होर्मुज से गुजरते थे। उनके मुताबिक, अगर अब कुछ रातों में केवल दो-तीन जहाज ही इस रास्ते से गुजर पा रहे हैं, तो यह भी ईरान के नियंत्रण को दर्शाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मन हाइब्रिड युद्ध के जरिए ईरान के अंदर अशांति और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है।

'कूटनीति के जरिए आत्मसमर्पण नहीं करेगा ईरान'

ईरानी संसद स्पीकर ने कहा कि अमेरिका कूटनीति के जरिए ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन उनका देश ऐसा कभी नहीं करेगा।

उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि तेहरान फिलहाल अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है।

जहाजों की आवाजाही के लिए ओमान से बातचीत

होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार घटती जहाजों की आवाजाही के बीच ईरान दक्षिणी हिस्से में स्थित ओमान के साथ एक व्यवस्था पर बातचीत कर रहा है।

इसका उद्देश्य समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका इस व्यवस्था को स्वीकार करेगा या नहीं।

खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के दोबारा खोलने की जरूरत पर जोर दिया है।

ईरानी सेना ने अमेरिका को दी भारी नुकसान की चेतावनी

ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB पर प्रसारित बयान में ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी।

बयान में कहा गया कि सिस्तान और बलूचिस्तान तथा होर्मोजगान प्रांतों में अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरानी सेना अमेरिका के खिलाफ गंभीर और विनाशकारी जवाबी कार्रवाई कर सकती है।

ईरानी सेना ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी कथित शत्रुतापूर्ण कार्रवाई जारी रखती है, तो उसे आगे और भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बढ़ते दावों के बीच युद्ध का खतरा गहराया

ईरान की ओर से जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले तथा अमेरिकी सैनिकों को हुए नुकसान के दावे सामने आए हैं। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान में सैन्य ठिकानों पर अपनी कार्रवाई जारी रखने की बात कह रहा है।

हालांकि, अमेरिकी सैनिकों की मौत, हेलीकॉप्टरों के नष्ट होने और बहरीन में ड्रोन हमले जैसे ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से सामने आ रहे बयानों को दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

लेकिन इतना स्पष्ट है कि ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब होर्मुज जलडमरूमध्य, खाड़ी क्षेत्र और अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।