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International Power Game: भारत आगे, चीन मजबूत, पुतिन ने अमेरिका को दी चेतावनी कहा - 'तेल की कीमतें बढ़ीं तो...'

 

शुक्रवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) में बोलते हुए, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान और चीन के बारे में बात की। उन्होंने दोहराया कि 1947 से ही भारत और रूस के बीच भाई जैसे संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि भारतीय लोग कितने प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे हैं। भारतीयों में असाधारण क्षमताएं हैं, जिन्होंने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है, खासकर कोडिंग और अन्य क्षेत्रों में।"

**रूस ने भारत में 25 अरब डॉलर का निवेश किया है: पुतिन**

पुतिन ने बताया कि रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में 25 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस पैसे का इस्तेमाल तेल रिफाइनरी, बंदरगाह और गैस स्टेशन (पेट्रोल पंप) बनाने में किया जा रहा है। मध्य पूर्व की स्थिति के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को अभी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में, रूस ऊर्जा आपूर्ति (तेल और गैस) बढ़ाकर और तकनीक साझा करके भारत का समर्थन कर रहा है - एक मददगार दोस्त की तरह। दोनों देश सकारात्मक परिणाम पाने और भविष्य में इस साझेदारी को और मजबूत करने के लिए सहयोग कर रहे हैं।

**भारत बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकता: पुतिन**

पुतिन ने दोहराया कि भारत एक ऐसा देश है जो कभी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकता। चीन के बारे में पुतिन ने कहा, "वह भी अपनी संप्रभुता बनाए रखता है और स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लेता है। अपनी ताकत के कारण, चीन किसी बाहरी नियंत्रण में नहीं आता है।"

**रूस-चीन संबंधों के बारे में पुतिन ने क्या कहा?**

पुतिन ने कहा कि ऊर्जा और हाई-टेक क्षेत्रों में रूस और चीन की बराबर की साझेदारी है। रूस से चीन को निर्यात की जाने वाली हाई-टेक मशीनरी और उपकरणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। रूस चीन में परमाणु ऊर्जा संयंत्र बना रहा है; चार इकाइयां पहले से ही चालू हैं, और रूसी तकनीक पर आधारित चार और इकाइयां अभी बन रही हैं। दोनों देश जानकारी, डेटा और तकनीक साझा करते हैं और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखेंगे। अमेरिका को पुतिन की सलाह

पुतिन ने चेतावनी दी है कि तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा, "अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इससे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं, खासकर अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा है। अमेरिकी डॉलर को अब गोल्ड स्टैंडर्ड का समर्थन हासिल नहीं है; इसकी मजबूती और स्थिरता पूरी तरह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भरोसे और स्थिरता पर निर्भर करती है।" उन्होंने आगे कहा, "महंगाई को कम रखना आर्थिक स्थिरता के लिए एक ज़रूरी शर्त है। अगर तेल महंगा होता है और महंगाई बढ़ती है, तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नींव को खतरा हो सकता है। इन आर्थिक मुश्किलों से बचने के लिए तेल सेक्टर में स्थिरता लाना बहुत ज़रूरी है।"