अमेरिका के ओशो के बसाए शहर रजनीशपुरम पहुंचे भारतीय YouTuber, पुराने विवाद की यादें आज भी मौजूद होने का दावा
अमेरिका के ओरेगन में आध्यात्मिक गुरु ओशो द्वारा बसाए गए शहर ‘रजनीशपुरम’ को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय यूट्यूबर शंटी, जो ‘Shanty Dreams’ नाम से अपना चैनल चलाते हैं, इस जगह पर पहुंचे और वहां का वीडियो बनाया। उनके वीडियो में ओशो से जुड़ी जगहें, पुराने निर्माण और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएं दिखाई गई हैं।
यूट्यूबर का दावा है कि रजनीशपुरम के पुराने विवादों की छाप आज भी यहां दिखाई देती है। उनके मुताबिक, कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका और वहां मौजूद लोगों के बीच भारतीयों को लेकर नाराजगी होने की बात भी सामने आई। हालांकि, इन अनुभवों के आधार पर पूरे स्थानीय समुदाय की सोच के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
क्या है रजनीशपुरम का इतिहास?
ओशो, जिन्हें पहले भगवान श्री रजनीश के नाम से जाना जाता था, ने 1980 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के ओरेगन राज्य के वास्को काउंटी में रजनीशपुरम नाम का एक समुदाय बसाया था। यहां उनके हजारों अनुयायी रहने लगे थे। उनका उद्देश्य एक ऐसा समुदाय बनाना था, जहां लोग ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ सामुदायिक जीवन बिता सकें।
शुरुआत में इस जगह को बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यहां आवास, सामुदायिक सुविधाएं और ध्यान के लिए बड़े परिसर बनाए गए। लेकिन कुछ ही समय में स्थानीय निवासियों और ओशो के अनुयायियों के बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक और कानूनी विवाद बढ़ने लगे।
स्थानीय लोगों और ओशो के अनुयायियों के बीच क्यों बढ़ा विवाद?
रजनीशपुरम के विस्तार और स्थानीय राजनीति में उसके प्रभाव को लेकर विवाद गहराता गया। स्थानीय निवासियों के एक वर्ग ने समुदाय की गतिविधियों का विरोध किया, जबकि ओशो के अनुयायियों का पक्ष था कि वे कानूनी रूप से जमीन खरीदकर वहां रह रहे थे और अपना समुदाय विकसित कर रहे थे।
इस विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया। 1984 में स्थानीय लोगों को निशाना बनाकर साल्मोनेला बैक्टीरिया से भोजन दूषित करने की घटना हुई, जिसमें सैकड़ों लोग बीमार पड़े। इस मामले में रजनीश आंदोलन से जुड़े लोगों पर आरोप लगे और जांच के बाद आपराधिक कार्रवाई भी हुई। इस घटना ने रजनीशपुरम को अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।
1985 में आंदोलन के प्रमुख लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रम के बाद समुदाय बिखरने लगा। कुछ ही वर्षों में रजनीशपुरम का पुराना स्वरूप खत्म हो गया।
आज कैसा दिखाई देता है रजनीशपुरम?
यूट्यूबर शंटी के वीडियो में रजनीशपुरम तक पहुंचने वाला रास्ता और वहां मौजूद कुछ पुराने निर्माण दिखाई देते हैं। वीडियो के अनुसार, कभी ओशो के अनुयायियों के रहने और ध्यान करने के लिए बनाए गए कुछ केबिन अब भी मौजूद हैं। इनमें से कुछ की मरम्मत भी की गई है।
वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि पहले रजनीशपुरम की पहचान बताने वाले कुछ संकेतक अब वहां नहीं दिखाई देते। हालांकि, मौजूदा इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
यूट्यूबर को स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाने से रोका?
शंटी ने अपने वीडियो में बताया कि वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें कैमरे से रिकॉर्डिंग करने से मना किया। उनके मुताबिक, एक महिला ने भी उनसे वीडियो बनाना बंद करने और वहां से चले जाने के लिए कहा।
वीडियो में एक बोर्ड का भी जिक्र है, जिस पर ‘Rajneesh Invasion’ लिखा होने की बात कही गई है। बताया गया है कि यह बोर्ड रजनीश आंदोलन के खिलाफ स्थानीय लोगों के विरोध की याद दिलाता है।
यूट्यूबर के अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें भारतीयों को लेकर नाराजगी होने की बात बताई। हालांकि, यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और वीडियो में सामने आए लोगों के कथन हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि वहां के सभी निवासी भारतीयों के प्रति नफरत रखते हैं।
पांच साल के भीतर बिखर गया था ओशो का समुदाय
रजनीशपुरम का विस्तार 1980 के दशक की शुरुआत में तेजी से हुआ था, लेकिन स्थानीय विरोध, राजनीतिक टकराव और आपराधिक मामलों के कारण यह समुदाय लंबे समय तक कायम नहीं रह सका। 1985 के बाद इसके विघटन की प्रक्रिया तेज हो गई।
आज रजनीशपुरम का इतिहास अमेरिका के सबसे चर्चित आध्यात्मिक और सामाजिक विवादों में गिना जाता है। शंटी के वीडियो ने एक बार फिर इस जगह को चर्चा में ला दिया है और पुराने दौर की यादों के साथ-साथ वहां के मौजूदा हालात को भी सामने रखा है।