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भारत को मिलेगा चौथा S-400 सिस्टम, पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ेगी एयर डिफेंस ताकत

 

भारत की वायु रक्षा क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलने जा रहा है। रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का चौथा स्क्वाड्रन इस सप्ताह भारत को मिलने वाला है। यह सिस्टम भारत की पश्चिमी सीमा पर तैनात किया जाएगा, जिससे पाकिस्तान और पश्चिमी मोर्चे की तरफ से आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ सुरक्षा और मजबूत होगी। यह डिलीवरी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं और हाल ही में हुए सैन्य ऑपरेशनों के बाद भारत अपनी एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत कर रहा है।

पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक तैनाती

सूत्रों के अनुसार, चौथा S-400 सिस्टम पश्चिमी मोर्चे यानी पाकिस्तान सीमा के करीब तैनात किया जाएगा। इससे भारत की एयर डिफेंस कवरेज और तेज प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा। पहले से मौजूद तीन S-400 स्क्वाड्रन को भी अलग अलग रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है, जिसमें सिलीगुड़ी कॉरिडोर, पठानकोट और राजस्थान तथा गुजरात के संवेदनशील इलाके शामिल हैं। नया सिस्टम इसी नेटवर्क को और मजबूत करेगा।

क्या है S-400 सिस्टम की ताकत

S-400 दुनिया के सबसे आधुनिक लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम में से एक माना जाता है। यह फाइटर जेट, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई खतरों को कई सौ किलोमीटर दूर तक ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसमें अलग अलग रेंज की मिसाइलें शामिल होती हैं, जो अलग-अलग ऊंचाई और दूरी के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम हैं। यही वजह है कि इसे भारत की एयर डिफेंस शील्ड का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के सैन्य घटनाक्रम और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत और बढ़ गई है। इसी कारण भारत लगातार अपनी वायु सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। S-400 सिस्टम ने पहले भी कई मौकों पर अपनी क्षमता साबित की है, जिससे इसे भारत की सुरक्षा रणनीति में बेहद अहम माना जा रहा है।

भारत रूस रक्षा साझेदारी

भारत और रूस के बीच यह डील 2018 में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से हुई थी, जिसमें पांच S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का समझौता शामिल है। अब तक भारत को तीन सिस्टम मिल चुके हैं और बाकी सिस्टम चरणबद्ध तरीके से पहुंचाए जा रहे हैं।