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UN की रिपोर्ट में D-कंपनी को भारत में सक्रिय अपराधी संगठन बताने पर भड़का भारत, वीडियो में कहा- दावे के समर्थन में नहीं दिए गए सबूत

 

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन बताए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने कहा कि रिपोर्ट में किया गया यह दावा गलत है और इसके समर्थन में कोई ठोस जानकारी या सबूत नहीं दिए गए हैं। भारत ने चेतावनी दी कि इस तरह की तथ्यात्मक गलतियों से संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता और छवि को नुकसान पहुंच सकता है। रिपोर्ट को लेकर इसके लेखक बेन सॉल की आर्थिक मदद के स्रोतों पर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, चीन से कथित वित्तीय सहायता को लेकर लगाए गए आरोपों और रिपोर्ट की सामग्री के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

D-कंपनी को लेकर UN की रिपोर्ट पर भारत की आपत्ति

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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम के गिरोह डी-कंपनी को भारत में मौजूद अपराधी संगठन के रूप में वर्णित किया गया था। भारत ने इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रिपोर्ट में इसे साबित करने वाली जानकारी नहीं दी गई है।भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट में तथ्यों की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है। किसी संगठन की मौजूदगी या गतिविधियों को लेकर दावा करते समय उसके समर्थन में विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना जरूरी है।भारत ने यह भी कहा कि बिना पर्याप्त आधार के इस तरह के दावे किए जाने से संयुक्त राष्ट्र की छवि प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस मामले में भारत की आपत्ति और रिपोर्ट में दर्ज विवरण के बीच विवाद को समझने के लिए संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है।

जुलाई 2026 में तैयार हुई थी रिपोर्ट

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह रिपोर्ट बेन सॉल ने जुलाई 2026 में तैयार की थी। इसे अक्टूबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान पेश किया गया था।बेन सॉल ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े विषयों पर उनका अकादमिक काम रहा है। इस रिपोर्ट में डी-कंपनी को लेकर किए गए दावे के बाद इसके निष्कर्षों और आधार पर सवाल उठे हैं।भारत की आपत्ति का मुख्य केंद्र रिपोर्ट में किए गए दावे के समर्थन में पर्याप्त जानकारी का कथित अभाव है। इस तरह के मामलों में रिपोर्ट की भाषा, इस्तेमाल किए गए स्रोत और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा अहम होती है।

बेन सॉल को चीन से आर्थिक मदद मिलने का आरोप

रिपोर्ट के लेखक बेन सॉल को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के कामकाज पर नजर रखने वाले गठन यूएन वॉच ने मई 2026 में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि चीन की सरकार ने वर्ष 2024 में बेन सॉल को 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर दिए थे।यूएन वॉच की रिपोर्ट में चीन को सॉल का सबसे बड़ा आर्थिक मददगार बताया गया था। इस आरोप के बाद उनकी आर्थिक सहायता के स्रोतों को लेकर चर्चा हुई है।

हालांकि, किसी व्यक्ति या अकादमिक को किसी देश से आर्थिक सहायता मिलने का आरोप अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसके निष्कर्ष उस देश के प्रभाव में तैयार किए गए थे। इसके लिए वित्तीय सहायता की प्रकृति, शर्तों और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े प्रमाणों की जांच जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

भारत की आपत्ति ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों में तथ्यों की पुष्टि और निष्कर्षों के आधार को लेकर चर्चा को फिर सामने ला दिया है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्टों का उपयोग विभिन्न देशों और संगठनों के बारे में आकलन करने के लिए किया जाता है। इसलिए उनमें दर्ज जानकारी का विश्वसनीय और प्रमाण-आधारित होना आवश्यक है।फिलहाल, डी-कंपनी को लेकर रिपोर्ट में किए गए दावे पर भारत ने सवाल उठाए हैं। वहीं, बेन सॉल को चीन से कथित आर्थिक सहायता मिलने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनके रिपोर्ट से संभावित संबंध का आकलन अलग-अलग आधार पर किया जाना चाहिए। इस मामले में संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और पक्षों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।