सऊदी अरब पर हूती संकट: 'मक्का पैक्ट' के बावजूद पाकिस्तान क्यों नहीं भेज रहा अपनी सेना? जानें वजह
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब मक्का की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया है कि मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक संदिग्ध ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक ड्रोन पवित्र शहर के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया।
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि मक्का और दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने इसे 'रेड लाइन' बताते हुए कहा कि तीर्थयात्रियों और पवित्र स्थलों की सुरक्षा को खतरा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना 2017 में मक्का की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल की घटना के बाद इस तरह की दूसरी कोशिश के तौर पर बताई जा रही है।
हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से किया इनकार
हालांकि, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के इस दावे को खारिज कर दिया है। हूती पक्ष का कहना है कि वह इस्लाम के पवित्र स्थलों को निशाना नहीं बनाता और उसके सैन्य हमले सऊदी सैन्य तथा रणनीतिक ठिकानों के खिलाफ हैं।
हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन में लगातार हवाई हमले करने का भी आरोप लगाया है। इसके अलावा हूती पक्ष ने एक सऊदी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा भी किया है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मक्का रक्षा समझौते पर भी उठे सवाल
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने अगस्त 2026 में मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों पर हमला माना जाएगा और रक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
अब सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद इस समझौते की व्यावहारिक भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने 9 सितंबर को कहा था कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है तो समझौता सक्रिय हो सकता है।
लेकिन 10 सितंबर को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि समझौते के तहत किसी सैन्य कार्रवाई पर उस समय कोई चर्चा नहीं चल रही थी। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि वह समझौते की शर्तों के प्रति प्रतिबद्ध है।
सऊदी अरब और इजरायल के बीच खुफिया सहयोग की रिपोर्ट
इस बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने हूती गतिविधियों को लेकर इजरायल से खुफिया मदद मांगी है। रिपोर्टों के अनुसार यह संपर्क अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जरिए हुआ और इसका फोकस हूती सैन्य गतिविधियों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी पर है।
हालांकि, इसे सऊदी अरब और इजरायल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच अभी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और फिलिस्तीन के मुद्दे पर सऊदी अरब का घोषित रुख अलग है।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
हूती हमलों का असर सिर्फ सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं है। बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव तेल और दूसरे सामान की आवाजाही के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। हाल के हमलों के बाद सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों, सैन्य ठिकानों और दूसरे रणनीतिक स्थानों की सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ा है।
ऐसे में मक्का के पास ड्रोन इंटरसेप्ट की घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सऊदी अरब पर लगातार हमलों के बीच मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका आगे क्या रहती है।