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अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक अंतरिम शांति समझौता, वीडियो में जाने जंग खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

 

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम सामने आया है। दोनों देशों के बीच अंतरिम शांति समझौते (Interim Peace Agreement) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो गए हैं। इस समझौते को युद्धविराम की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह महत्वपूर्ण समझौता बुधवार रात फ्रांस के प्रतिष्ठित वर्साय पैलेस में हुआ, जहां अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे जुड़े MoU (Memorandum of Understanding) पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम बताया।

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समझौते के बाद ट्रम्प का बयान

हस्ताक्षर करने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए, जहां मीडिया ने उनसे शांति समझौते को लेकर सवाल किया। इस पर ट्रम्प ने कड़े अंदाज में कहा, “डील साइन हो गई है।” उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय मीडिया में तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

ईरान की ओर से भी डिजिटल हस्ताक्षर

सूत्रों के अनुसार, समझौते के कुछ ही समय बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान की ओर से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस तरह दोनों देशों की सहमति के साथ यह डील औपचारिक रूप से प्रभाव में आ गई।समझौते की आधिकारिक घोषणा भारतीय समयानुसार गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे की गई। घोषणा के तुरंत बाद यह समझौता लागू हो गया।

समझौते की प्रमुख शर्तें

इस अंतरिम समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना है।

सूत्रों के मुताबिक, समझौते के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—

  • ईरान और लेबनान में चल रहे सभी सैन्य अभियानों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाएगा
  • होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नौवहन के लिए फिर से खोल दिया जाएगा
  • अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त किया जाएगा

इन शर्तों को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की उम्मीद

इस समझौते के बाद अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह अंतरिम शांति स्थायी समाधान की ओर बढ़ेगा या सिर्फ अस्थायी राहत साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत हो सकता है।फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है और आने वाले दिनों में इस समझौते के प्रभावों का आकलन किया जाएगा।