यमन में महासंग्राम! हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर दागे ड्रोन और मिसाइल, जंग के बीच 82 हजार लोग बेघर
यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। यमन सरकार के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने दक्षिणी लाल सागर में मौजूद ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश नाम के दो रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इन द्वीपों पर हूतियों ने अपने लड़ाके तैनात कर दिए हैं।
दोनों द्वीप बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी संख्या में मालवाहक और दूसरे जहाज गुजरते हैं।
पहले मायून द्वीप और मोखा पर भी कब्जे का दावा
हूतियों की यह बढ़त ऐसे समय में सामने आई है, जब पिछले हफ्ते उन्होंने लाल सागर के तट पर मौजूद मोखा बंदरगाह शहर और मायून द्वीप पर भी कब्जा करने का दावा किया था।
इन इलाकों पर पहले सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना का नियंत्रण था। अगर हूतियों का इन इलाकों पर नियंत्रण मजबूत होता है, तो लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर उनका रणनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है।
सरकार और हूतियों के बीच हमले हुए तेज
यमन में दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ दिनों में सैन्य कार्रवाई बढ़ गई है। रविवार को यमनी सेना ने लाल सागर के आसपास हूतियों के ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए।
इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने का दावा किया। हमलों की आशंका के बीच सऊदी अरब के अबहा और खमिस मुशैत शहरों में सायरन बजाए गए और लोगों को सतर्क रहने को कहा गया।
यमन सीमा के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो लोगों के घायल होने की भी खबर है। इस घटना में एक मस्जिद और कुछ अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
चार हफ्तों में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाकों की मौत का दावा
सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स ने दावा किया है कि पिछले चार हफ्तों में हूतियों के खिलाफ लड़ाई में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे गए हैं।
संगठन के मुताबिक, इसी अवधि में होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए हैं। हालांकि, हूती संगठन ने इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।
यमनी सरकार ने लाल सागर के तटवर्ती इलाकों में अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया है। एक सरकारी अधिकारी ने हालिया नुकसान को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी बल दोबारा इन क्षेत्रों में लौटने की कोशिश करेंगे।
मोखा और ताइज में भी सैन्य कार्रवाई
रविवार को यमनी सेना ने मोखा, धुबाब और ताइज के कई इलाकों में हूती ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी तरफ हूतियों ने ताइज में सरकार और सऊदी समर्थित बलों के हमलों का दावा किया है।
हूतियों की ओर से सादा प्रांत में तोपखाने से गोलाबारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
करीब 12 साल से जारी है यमन का संघर्ष
यमन में सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष करीब 12 साल से जारी है। इस संघर्ष में सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।
2022 में दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई में काफी कमी आई थी। लेकिन अब हूतियों की हालिया बढ़त और सरकारी बलों की जवाबी कार्रवाई से यमन में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
घर छोड़ने वाले लोगों के सामने बड़ा मानवीय संकट
लगातार हो रही लड़ाई का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।
कई परिवारों को इतनी तेजी से घरों से निकलना पड़ा कि वे कपड़े, खाना और दूसरी जरूरी चीजें तक साथ नहीं ले जा सके। विस्थापित लोग कैंपों, दूसरे परिवारों के घरों और कई जगहों पर सड़कों के किनारे रहने को मजबूर हैं।
अदन के एक राहत कैंप के निदेशक के मुताबिक, विस्थापित परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं। होदेदा से भागे एक व्यक्ति ने बताया कि 2015 में जब उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा था, तब तैयारी करने का समय मिला था, लेकिन इस बार हालात इतने तेजी से बिगड़े कि वे मुश्किल से अपने बच्चों को साथ लेकर निकल पाए और केवल जरूरी हल्का सामान ही ले जा सके।
यमन में बढ़ती हिंसा के बीच अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर संघर्ष और बढ़ा, तो इसका असर न सिर्फ यमनी नागरिकों पर पड़ेगा, बल्कि लाल सागर के महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।