×

ग्लेशियरों पर दोहरा खतरा, वीडियो में जाने बढ़ते तापमान के साथ कालिख और धूल भी बढ़ा रहे बर्फ पिघलने की रफ्तार

 

हिमालय के ग्लेशियरों पर अब सिर्फ बढ़ते तापमान का खतरा नहीं है, बल्कि हवा में मौजूद कालिख और धूल के कण भी इनके तेजी से पिघलने की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रदूषण से निकलने वाले ये कण ऊंचे पहाड़ों तक पहुंचकर ग्लेशियरों की सफेद बर्फीली सतह पर जमा हो जाते हैं और बर्फ के गलने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं।

बर्फ पर जमी कालिख बढ़ाती है गर्मी का असर

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/vsaj2KjK3eI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/vsaj2KjK3eI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

गाड़ियों, कोयला आधारित बिजली संयंत्रों, फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों, घरेलू चूल्हों के धुएं के अलावा जंगलों और खेतों में लगने वाली आग से निकलने वाले सूक्ष्म कण हवा के साथ हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंचते हैं।जब ये कण ग्लेशियरों की बर्फ पर जमा हो जाते हैं तो बर्फ की चमक कम हो जाती है। सफेद बर्फ सूर्य की रोशनी को वापस परावर्तित करती है, लेकिन कालिख जमा होने के बाद बर्फ ज्यादा गर्मी सोखने लगती है। इससे बर्फ तेजी से पिघलने लगती है।

ग्लोबल वार्मिंग के साथ बढ़ी वैज्ञानिकों की चिंता

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहले ही हिमालयी ग्लेशियर दबाव में हैं। अब प्रदूषण से बढ़ रहा यह अतिरिक्त प्रभाव ग्लेशियरों को कमजोर और अस्थिर बना सकता है।ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से न सिर्फ जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है, बल्कि अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

नेपाल की घटना ने बढ़ाई चिंता

नेपाल में हाल में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बाढ़ की स्थिति बनी थी, जिससे भारी नुकसान हुआ। हालांकि इस घटना की सटीक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों पर जमा प्रदूषण ऐसे हादसों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

हिमालयी क्षेत्र के लिए चुनौती

हिमालय एशिया की कई प्रमुख नदियों का स्रोत है और करोड़ों लोगों की जल जरूरतें इन ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। ऐसे में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना पर्यावरण के साथ-साथ भविष्य में पानी की उपलब्धता के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के साथ-साथ वायु प्रदूषण कम करना भी जरूरी है, ताकि हिमालयी ग्लेशियरों को बचाने के प्रयासों को मजबूती मिल सके।