Gen Z vs Senior Citizens: यूरोप में क्यों बढ़ रहा युवाओं और बुजुर्गों के बीच टकराव? नौकरी, घर और पेंशन बनी वजह
दुनियाभर में Gen Z यानी युवा पीढ़ी अपनी मांगों को लेकर तेजी से आवाज उठा रही है। बांग्लादेश, नेपाल, पेरू और मेडागास्कर जैसे देशों में युवाओं के आंदोलनों ने राजनीति पर असर डाला है। अब यूरोप में भी युवा बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, बढ़ते किराए और घर खरीदने में आ रही मुश्किलों को लेकर सरकारों से सवाल कर रहे हैं।
इस बीच यूरोप के कई देशों में युवाओं और बुजुर्गों के बीच आर्थिक हितों का टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ युवा शिक्षा, रोजगार और किफायती आवास के लिए अधिक सरकारी निवेश चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुजुर्गों की पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारी खर्च लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
फ्रांस: शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की मांग, पेंशन भी बड़ी चुनौती
फ्रांस में युवाओं की प्रमुख चिंताओं में बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था शामिल हैं। युवा चाहते हैं कि स्कूलों की स्थिति सुधारी जाए और शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाया जाए। दूसरी ओर, सरकार के बजट का एक बड़ा हिस्सा पेंशन पर खर्च होता है।
रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 साल करने के फैसले के बाद फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। पेंशन सुधार का मुद्दा देश की राजनीति में काफी अहम रहा है।
अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा बनाए रखते हुए युवाओं की शिक्षा और रोजगार संबंधी जरूरतों के लिए भी पर्याप्त संसाधन कैसे उपलब्ध कराए जाएं। फ्रांस पर पहले से कर्ज का दबाव होने के कारण बजट में संतुलन बनाना आसान नहीं है।
स्पेन: बढ़ते किराए ने युवाओं की बढ़ाई परेशानी
स्पेन में युवाओं के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में बेरोजगारी और महंगे मकान शामिल हैं। घरों की कीमतें और किराए बढ़ने से कम आय वाले युवाओं के लिए स्वतंत्र रूप से रहना मुश्किल होता जा रहा है।
कई युवा 30 साल की उम्र के बाद भी अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। जो अलग घर में रहते हैं, उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए और रोजमर्रा के खर्चों में चला जाता है। ऐसे में बचत करके अपना घर खरीदना कठिन हो जाता है।
इसके उलट, जिन बुजुर्गों के पास पहले से मकान हैं, उन्हें संपत्ति की बढ़ती कीमतों से फायदा मिल सकता है। इस तरह संपत्ति रखने वालों और पहली बार घर खरीदने की कोशिश कर रहे युवाओं के बीच आर्थिक अंतर बढ़ने की चिंता सामने आ रही है।
ब्रिटेन: पेंशन व्यवस्था पर क्यों छिड़ी बहस?
ब्रिटेन में भी युवा बेरोजगारी, महंगे मकानों और किराए के दबाव से जूझ रहे हैं। लंदन जैसे बड़े शहरों में आवास की लागत अधिक होने के कारण नौकरी करने वाले युवाओं के लिए भी खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है।
वहीं, ब्रिटेन की पेंशन व्यवस्था में 'ट्रिपल लॉक' महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके तहत राज्य पेंशन में हर साल महंगाई दर, औसत वेतन वृद्धि या 2.5 प्रतिशत में से जो भी अधिक हो, उसके अनुसार बढ़ोतरी की जाती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्गों की पेंशन की क्रय शक्ति बनाए रखना है। हालांकि, इसके कारण सरकारी खर्च बढ़ने पर दूसरी सार्वजनिक सेवाओं के लिए बजट उपलब्ध कराने को लेकर बहस होती रहती है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि पेंशन पाने वाले बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और साथ ही युवाओं के लिए रोजगार, आवास तथा अन्य सुविधाओं पर भी पर्याप्त खर्च किया जा सके।
राजनीतिक फैसलों में बुजुर्गों की आवाज ज्यादा प्रभावी क्यों?
युवाओं और बुजुर्गों के बीच आर्थिक हितों का अंतर केवल सरकारी बजट तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई सामाजिक और राजनीतिक कारण भी हैं।
1. चुनावों में भागीदारी: बुजुर्ग मतदाताओं की नियमित चुनावी भागीदारी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर नेताओं को विशेष ध्यान देना पड़ता है।
2. परिवार की आर्थिक निर्भरता: कई परिवारों में बुजुर्गों की पेंशन से घरेलू खर्च चलाने में मदद मिलती है। पेंशन में कटौती होने पर उसका असर केवल बुजुर्गों पर नहीं, बल्कि उनके साथ रहने वाले अन्य सदस्यों पर भी पड़ सकता है।
3. भविष्य की पेंशन की चिंता: आज के कई युवा भी भविष्य में पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में वे मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर सावधानी बरत सकते हैं।
4. सीमित सरकारी बजट: सरकार के पास संसाधन सीमित होते हैं। पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसी जरूरतों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है। एक क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने के लिए दूसरे क्षेत्रों में बजट की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
क्या युवाओं और बुजुर्गों के बीच बढ़ेगा संघर्ष?
यूरोप की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकारें अलग-अलग पीढ़ियों की जरूरतों के बीच संतुलन बना पाएंगी। युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा, स्थिर नौकरी और किफायती घर भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं। वहीं, बुजुर्गों के लिए पेंशन और स्वास्थ्य सेवाएं सम्मानजनक जीवन का आधार हैं।
इसलिए इस बहस को केवल युवाओं बनाम बुजुर्गों के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली चुनौती ऐसी नीतियां बनाने की है, जिनसे बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित न हो और युवा भी बेहतर अवसर हासिल कर सकें। यूरोप की सरकारों के लिए आने वाले वर्षों में यही संतुलन एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक चुनौती बना रह सकता है।