Gaza Report: गाजा में महिलाओं और बच्चियों पर बढ़ा हिंसा का खतरा, बाल विवाह के मामलों में 123% उछाल
Gaza News: गाजा में युद्ध, विस्थापन, गरीबी और जरूरी संसाधनों की कमी के बीच महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ लैंगिक हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच दर्ज जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. रिपोर्ट में बताया गया है कि भोजन की कमी, गरीबी, आय के साधनों का अभाव, स्कूलों का बंद होना और लगातार विस्थापन इस जोखिम को बढ़ा रहे हैं.
14 साल की लड़की की शादी का मामला
UNFPA की रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों में ऐसे मामलों का जिक्र है, जहां परिवारों पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक दबाव के बीच कम उम्र की लड़कियों की शादी कराई गई. अप्रैल 2026 की UNFPA रिपोर्ट में भी बताया गया था कि कुछ परिवार युद्ध और गरीबी के बीच बेटियों की शादी को आर्थिक संकट से निपटने या उन्हें सुरक्षा देने के तरीके के रूप में देख रहे हैं.
कुछ मामलों में परिवारों ने बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए शादी को एक विकल्प माना. UNFPA के मुताबिक, ऐसे हालात में कम उम्र की लड़कियों को जबरन या कम उम्र में शादी के साथ-साथ हिंसा और किशोरावस्था में गर्भधारण जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है.
यौन हिंसा और जबरन शादी की बढ़ती चिंता
UNFPA की अप्रैल-जून 2026 की रिपोर्ट में गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के कई रूप दर्ज किए गए हैं. इनमें शारीरिक हमले, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा तथा भोजन, नकद, आश्रय और अन्य जरूरी संसाधनों से वंचित करना शामिल है. रिपोर्ट में यौन हिंसा और जबरन विवाह को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, विस्थापन शिविरों में भीड़भाड़, पर्याप्त निजी जगह की कमी और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था महिलाओं और लड़कियों के लिए जोखिम बढ़ा रही है. UNFPA ने बताया कि शारीरिक हमलों के मामले अक्सर भीड़भाड़ वाले टेंट, विस्थापन मार्गों और सार्वजनिक पानी लेने की जगहों के आसपास सामने आए.
परिवार के अंदर भी बढ़ा हिंसा का खतरा
UNFPA की रिपोर्ट में घरेलू और पारिवारिक हिंसा से जुड़े मामलों को भी रेखांकित किया गया है. युद्ध के कारण घरों का नष्ट होना, रोजगार और आय का खत्म होना, बार-बार विस्थापन तथा रहने की खराब परिस्थितियां परिवारों पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं.
रिपोर्ट में बताया गया कि मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा दर्ज मामलों का एक बड़ा हिस्सा रही. अप्रैल-जून 2026 में दर्ज लैंगिक हिंसा के मामलों में भावनात्मक हिंसा करीब 31 फीसदी थी. वहीं, जरूरी संसाधनों और सेवाओं से वंचित किए जाने के मामले करीब एक तिहाई रहे.
यौन हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी
UNFPA के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 की तुलना में अप्रैल-जून 2026 में दर्ज लैंगिक हिंसा के मामलों में 27 फीसदी की वृद्धि हुई. जनवरी से जून 2026 के दौरान कुल रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है. हालांकि, UNFPA यह भी स्पष्ट करता है कि मामलों में बढ़ोतरी का एक कारण सुरक्षा और सहायता सेवाओं के विस्तार से अधिक पीड़ितों का सामने आ पाना भी हो सकता है.
इसलिए ये आंकड़े केवल हिंसा की वास्तविक घटनाओं की संख्या नहीं बताते, बल्कि रिपोर्टिंग और सेवाओं तक पहुंच में हुए बदलाव को भी दर्शाते हैं.
माता-पिता खो चुकी बच्चियों पर भी खतरा
युद्ध और विस्थापन के कारण माता-पिता या अन्य देखभाल करने वालों से अलग हुई बच्चियों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है. UNFPA ने बताया है कि परिवार से अलगाव, शिक्षा व्यवस्था का बाधित होना और सुरक्षित ठिकानों की कमी किशोरियों को जबरन विवाह और अन्य तरह के शोषण के जोखिम में डाल सकती है.
UNFPA ने बढ़ाई सुरक्षित स्थानों की जरूरत
UNFPA के मुताबिक, गाजा में महिलाओं और लड़कियों के लिए Women and Girls Safe Spaces बेहद महत्वपूर्ण हैं. इन केंद्रों पर हिंसा से प्रभावित लोगों को मनोसामाजिक, कानूनी, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है.
संस्था ने कहा है कि गाजा के सैकड़ों विस्थापन स्थलों में रहने वाली महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच अभी भी सीमित है. UNFPA ने लैंगिक हिंसा की रोकथाम और पीड़ितों के लिए सेवाओं को मानवीय सहायता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया है.
नोट: UNFPA के आंकड़े मुख्य रूप से उसके साझेदार संगठनों द्वारा दर्ज और प्रबंधित मामलों पर आधारित हैं. इसलिए इन्हें गाजा में लैंगिक हिंसा की सभी घटनाओं की पूर्ण संख्या नहीं माना जा सकता. रिपोर्ट खुद बताती है कि सुरक्षा सेवाओं तक पहुंच बढ़ने से कुछ मामलों की रिपोर्टिंग भी बढ़ सकती है.