☰
×

ट्रम्प से दुश्मनी से दोस्ती तक: मार्क जुकरबर्ग का बदला रुख, अब AI के बड़े फैसलों में भी बढ़ा प्रभाव

 

कभी ट्रम्प के निशाने पर रहने वाले मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग अब अमेरिकी राष्ट्रपति के करीब नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रतिबंध से शुरू हुआ विवाद अब साझेदारी में बदलता दिख रहा है। जुकरबर्ग ने ट्रम्प प्रशासन के साथ रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका असर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका पर भी दिखाई दे रहा है।

ओबामा के करीबी रहे जुकरबर्ग, फिर ट्रम्प से हुआ टकराव

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भी अच्छे संबंधों के लिए चर्चा में रहे थे। साल 2011 में ओबामा ने फेसबुक मुख्यालय का दौरा किया था, जहां दोनों की मुलाकात हुई थी।हालांकि, अमेरिकी राजनीति में परिस्थितियां बदलने के साथ जुकरबर्ग और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच टकराव भी बढ़ गया। जनवरी 2021 में अमेरिकी संसद पर हुए हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि उनकी पोस्ट से हिंसा को बढ़ावा मिल सकता है।इस कार्रवाई से ट्रम्प बेहद नाराज हुए। उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए और जुकरबर्ग के खिलाफ भी तीखी बयानबाजी की। दोनों के बीच यह विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहा।

2024 में कैसे बदले जुकरबर्ग और ट्रम्प के रिश्ते?

दोनों के संबंधों में बदलाव की शुरुआत जुलाई 2024 में दिखाई दी। पेंसिल्वेनिया में चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प की प्रतिक्रिया की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमले के बाद ट्रम्प का उठकर मुट्ठी लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे प्रभावशाली चीजों में से एक था।

जुकरबर्ग की इस टिप्पणी को दोनों के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत के तौर पर देखा गया। इसके कुछ समय बाद ट्रम्प ने भी जुकरबर्ग के प्रति अपना रुख नरम किया और कहा कि अब वह उन्हें पहले से ज्यादा पसंद करते हैं।इसके बाद दोनों के बीच संवाद और नजदीकी बढ़ने लगी। ट्रम्प की सत्ता में वापसी के बाद यह बदलाव और स्पष्ट दिखाई दिया।

ट्रम्प का भरोसा जीतने के लिए जुकरबर्ग ने उठाए कई कदम

ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद मेटा और जुकरबर्ग ने अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंध बेहतर करने की दिशा में कई कदम उठाए।

1. शपथ ग्रहण समारोह के लिए 10 लाख डॉलर का योगदान

मेटा ने ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 10 लाख डॉलर का दान दिया। समारोह में जुकरबर्ग को दूसरे प्रमुख उद्योगपतियों के साथ प्रमुख स्थान मिला।

2. मुकदमे के निपटारे के लिए समझौता

ट्रम्प ने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर मेटा के खिलाफ मुकदमा किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इस मामले को निपटाने के लिए करीब 2.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई।

3. कंपनी में अहम नियुक्तियां

मेटा ने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े जोएल कपलान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी। इसके अलावा ट्रम्प प्रशासन में काम कर चुकी डीना पॉवेल मैककॉर्मिक को भी कंपनी में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली। इन नियुक्तियों को कंपनी के राजनीतिक और प्रशासनिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया।

4. सोशल मीडिया नीतियों में बदलाव

मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन और पोस्ट की निगरानी से जुड़ी नीतियों में बदलाव किए। रिपब्लिकन नेताओं की ओर से लंबे समय से आरोप लगाए जा रहे थे कि सोशल मीडिया कंपनियां रूढ़िवादी विचारों को दबाती हैं। मेटा ने अपने नियमों में बदलाव कर इस बहस के बीच अपना रुख बदला।

AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बढ़ा जुकरबर्ग का प्रभाव

ट्रम्प और जुकरबर्ग के बेहतर होते संबंधों का एक अहम पहलू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। रिपोर्ट के अनुसार, जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार करने में भूमिका निभाई।व्हाइट हाउस में ट्रम्प और प्रमुख टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान इस समझौते पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य AI के लिए सुरक्षा मानक तैयार करना, उन्हें लागू करने की व्यवस्था बनाना और उनके पालन की जांच करना है।AI तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में इसके संभावित जोखिमों, जवाबदेही और सुरक्षा मानकों को लेकर दुनिया भर में बहस चल रही है। बड़ी टेक कंपनियां चाहती हैं कि इन नियमों को तैयार करने में उनकी तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाए।

जुकरबर्ग का मानना है कि AI से जुड़ी कई चिंताओं को तकनीकी सुधारों और बेहतर सुरक्षा उपायों के जरिए कम किया जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए समझौते की सीमाएं भी हैं। यदि इसमें कानूनी बाध्यता और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, तो इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठ सकते हैं।

क्या ट्रम्प से नजदीकी मेटा के लिए फायदेमंद साबित होगी?

ट्रम्प के करीब आने से जुकरबर्ग को अमेरिकी प्रशासन के साथ संवाद बढ़ाने और तकनीकी नीतियों पर अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है। AI जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में सरकारी नियमों का कंपनियों के कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसलिए मेटा के लिए नीतिगत चर्चाओं में सक्रिय भूमिका अहम है।लेकिन इस रणनीति में जोखिम भी छिपे हैं। अमेरिकी राजनीति में सत्ता का संतुलन बदलने पर मेटा को अपने फैसलों और ट्रम्प प्रशासन के साथ संबंधों को लेकर नए सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेताओं ने मेटा के राजनीतिक संबंधों और खर्चों पर सवाल उठाए हैं। सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने भी कंपनी से रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की प्राथमिकताओं से जुड़ी परियोजनाओं को दिए गए धन के बारे में जानकारी मांगी थी। आलोचकों का आरोप है कि मेटा राजनीतिक समीकरणों के जरिए अपने कारोबारी हितों को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, जुकरबर्ग के समर्थक इसे बदलते राजनीतिक माहौल में कंपनी के हितों के अनुरूप व्यावहारिक रणनीति मान सकते हैं।

क्या लंबे समय तक कायम रहेगी यह दोस्ती?

मार्क जुकरबर्ग और डोनाल्ड ट्रम्प के रिश्तों में आया बदलाव अमेरिकी राजनीति और टेक उद्योग के बीच बढ़ते संबंधों को दर्शाता है। जिस ट्रम्प के साथ कभी मेटा का टकराव हुआ था, अब उन्हीं के प्रशासन के साथ कंपनी AI जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर काम करती दिखाई दे रही है।हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों के संबंध भविष्य में भी इसी तरह बने रहेंगे। आने वाले चुनाव, अमेरिकी संसद में सत्ता का संतुलन और AI को लेकर बनने वाली नीतियां इस रिश्ते की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जुकरबर्ग और ट्रम्प की बढ़ती नजदीकी तकनीकी क्षेत्र में सहयोग का नया रास्ता खोलेगी या भविष्य में राजनीतिक विवादों की वजह बनेगी।