अमेरिका–इज़राइल और ईरान युद्ध का पांचवां दिन, वीडियो में देखें श्रीलंका तट के पास ईरानी जहाज पर पनडुब्बी से हमला, 32 घायल
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध आज पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है। संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है और इसके असर अब पश्चिम एशिया से बाहर भी दिखाई देने लगे हैं। इसी कड़ी में श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी जहाज पर पनडुब्बी से हमला किए जाने की खबर सामने आई है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
श्रीलंका नेवी के मुताबिक यह हमला देर रात समुद्री सीमा के नजदीक हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहाज पर सवार लोगों में से 32 लोग घायल हुए हैं, जबकि कई अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के तुरंत बाद श्रीलंका नेवी और तटरक्षक बल ने संयुक्त रूप से सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। समुद्र में हेलीकॉप्टर, गश्ती पोत और गोताखोरों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेवी प्रवक्ता ने बताया कि घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। कई घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि कुछ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। चिकित्सा दलों को अलर्ट पर रखा गया है और आपातकालीन सेवाओं को भी सक्रिय कर दिया गया है।
हालांकि, घटना के बाद जारी किए गए शुरुआती आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। पहले श्रीलंका नेवी की ओर से बताया गया था कि हमले के बाद 101 लोग लापता हैं और 78 घायल हुए हैं। लेकिन बाद में नेवी प्रवक्ता ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि ये आंकड़े सही नहीं थे और तकनीकी त्रुटि के कारण गलत जानकारी साझा हो गई थी। संशोधित आंकड़ों के अनुसार 32 लोग घायल हुए हैं और लापता लोगों की संख्या की पुष्टि अभी की जा रही है।
इस हमले के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर अभी कोई बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला मौजूदा युद्ध से जुड़ा हो सकता है। अमेरिका–इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को भी प्रभावित किया है। हिंद महासागर में रणनीतिक गतिविधियां बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान की ओर से इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। वहीं श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वह अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।