88 साल की उम्र में पोप फ्रांसिस का निधन, कभी नाइट क्लब के रहे थे बाउंसर
कैथोलिक ईसाई नेता पोप फ्रांसिस का निधन हो गया है। उन्होंने 88 वर्ष की आयु में इटली के वेटिकन सिटी में अंतिम सांस ली। कार्डिनल केविन फैरेल ने वेटिकन सिटी की ओर से जारी एक बयान में उनकी मृत्यु की घोषणा की। पोप के निधन के कारण वेटिकन सिटी में 9 दिनों के शोक की घोषणा की गई है।
कैथोलिक चर्च के मुख्यालय वेटिकन के अनुसार, 88 वर्षीय पोप फ्रांसिस को डबल निमोनिया के इलाज के लिए 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें निमोनिया के साथ-साथ फेफड़ों में संक्रमण भी हो गया। पोप फ्रांसिस के श्वसन मार्ग में पॉलीमाइक्रोबियल संक्रमण था। वह पांच सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनकी रक्त परीक्षण रिपोर्ट में गुर्दे की विफलता के लक्षण दिखाई दिए। प्लेटलेट्स भी कम थे। उन्हें ब्रोंकाइटिस रोग था। उन्होंने अपना अंतिम संदेश ईस्टर रविवार, 20 अप्रैल को दिया।
अंतिम संदेश ईस्टर पर दिया गया था
आपको बता दें कि पोप फ्रांसिस रोमन कैथोलिक चर्च के पहले लैटिन अमेरिकी पोप थे। वह 2013 में कैथोलिक ईसाइयों की उपस्थिति में रोमन कैथोलिक चर्च के 266वें पोप बने। वह पोप बेनेडिक्ट XVI के उत्तराधिकारी थे। अर्जेंटीना के मूल निवासी पोप विश्वभर में युद्धों के विरोध के लिए जाने जाते थे। पोप फ्रांसिस 1000 वर्षों में कैथोलिक पादरी बनने वाले पहले गैर-यूरोपीय पादरी थे।
पोप का जन्म 17 दिसम्बर 1936 को अर्जेंटीना के फ्लोरेंस शहर में हुआ था। उनका वास्तविक नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो था। पोप फ्रांसिस के दादा-दादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी से बचने के लिए इटली छोड़कर अर्जेंटीना चले गए थे। पोप ने अपना बचपन अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में बिताया। वह सोसाइटी ऑफ जीसस (जेसुइट्स) के सदस्य बनने वाले पहले पोप थे। वह अमेरिकी महाद्वीप से पहले पोप थे।
उन्होंने ब्यूनस आयर्स विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र और धर्मशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। पोप 13 दिसंबर 1969 को 33 वर्ष की आयु में ब्यूनस आयर्स में पहली बार पुजारी बने थे। 1998 में ब्यूनस आयर्स के आर्कबिशप बने। 1998 में ब्यूनस आयर्स के आर्कबिशप बने। 2001 में पोप जॉन पॉल द्वितीय ने उन्हें कार्डिनल बनाया था। पुजारी बनने से पहले पोप एक नाइट क्लब में बाउंसर थे। उन्होंने एक रसायनज्ञ तकनीशियन के रूप में भी काम किया। उन्होंने अर्जेंटीना के कॉलेज में साहित्य और मनोविज्ञान भी पढ़ाया। पोप के रूप में उन्होंने विश्व भर के 60 से अधिक देशों की यात्रा की।