Europe Protest: महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ यूरोप में बढ़ा जनाक्रोश, 27 देशों में 22 हजार प्रदर्शन; फ्रांस सबसे आगे
यूरोप के कई देशों में महंगाई, बेरोजगारी, महंगे मकान और सरकारी नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। इस साल 19 अक्टूबर तक यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों में करीब 22 हजार प्रदर्शन दर्ज किए गए। इनमें फ्रांस सबसे आगे रहा, जहां बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं।
आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ की कुल आबादी में फ्रांस की हिस्सेदारी करीब 15% है, लेकिन हिंसक प्रदर्शनों में उसकी हिस्सेदारी 66% बताई गई है। अक्टूबर महीने में फ्रांस के अलावा इटली, जर्मनी, अल्बानिया, स्पेन, ग्रीस, बेल्जियम और सर्बिया में भी आंदोलन हुए।
फ्रांस में लगातार तीसरे हफ्ते प्रदर्शन, 560 से ज्यादा गिरफ्तार
फ्रांस में इस साल करीब 7,300 प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। महंगाई और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ यहां लगातार तीसरे सप्ताह विरोध जारी रहा। छात्र, कर्मचारी और मजदूर संगठनों के सदस्य बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे। सरकार के अनुसार, देशभर में करीब 3.2 लाख लोगों ने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।
इससे पहले 17 अक्टूबर को करीब 5.5 लाख और 24 अक्टूबर को 4 लाख से ज्यादा लोग प्रदर्शन कर चुके थे। आंदोलन की शुरुआत स्कूलों की खराब इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों की समस्याओं को लेकर छात्रों की नाराजगी से हुई थी। बाद में मजदूर संगठनों और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों से असंतुष्ट लोग भी इसमें शामिल हो गए।
प्रदर्शनों के दौरान 560 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया। फ्रांस की आर्थिक स्थिति भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। इस साल देश की अर्थव्यवस्था में केवल 0.4% वृद्धि का अनुमान है, जबकि पिछले कुछ वर्षों में औसत विकास दर करीब 1.4% रही थी। बढ़ता सरकारी कर्ज और खर्च भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
जर्मनी के 34 शहरों में सड़कों पर उतरे युवा
फ्रांस के बाद जर्मनी में भी विरोध प्रदर्शनों का असर दिखाई दे रहा है। 'जेन जी रेजिस्ट' संगठन के आह्वान पर देश के 34 शहरों में एक लाख से ज्यादा युवा सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और पर्यावरण से जुड़ी मांगें उठाईं।
बर्लिन और फ्रैंकफर्ट समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान कुछ स्थानों पर दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं।
पांच साल के औसत से 7% कम प्रदर्शन
वैश्विक संगठन ACLED के आंकड़ों के मुताबिक, यूरोपीय संघ में इस साल 19 अक्टूबर तक दर्ज प्रदर्शनों की संख्या पिछले पांच साल के औसत से करीब 7% कम रही। पिछले वर्षों में प्रदर्शनों का आंकड़ा इस प्रकार रहा:
- 2022: करीब 24 हजार प्रदर्शन
- 2023: करीब 23 हजार प्रदर्शन
- 2024: करीब 24 हजार प्रदर्शन
- 2025: करीब 21 हजार प्रदर्शन
हालांकि, कुछ देशों में विरोध प्रदर्शनों की संख्या बढ़ी है। पोलैंड में पिछले साल के मुकाबले प्रदर्शनों में 50% से ज्यादा और ग्रीस में करीब 25% की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, 2022 के मुकाबले ब्रिटेन में प्रदर्शनों की संख्या लगभग 50% कम हुई है। स्पेन में भी विरोध प्रदर्शनों में गिरावट आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में यूरोपीय संघ में हिंसक प्रदर्शनों की संख्या सामान्य स्तर से करीब तीन गुना बढ़ी है। इनमें ज्यादातर घटनाएं पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई हैं।
नवंबर में कई देशों में फिर आंदोलन की तैयारी
यूरोप के कई देशों में आने वाले दिनों में नए प्रदर्शनों और हड़तालों की तैयारी की जा रही है।
- फ्रांस: अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक माहौल गर्म रहने की संभावना है। नेताओं पर जनता की मांगों को लेकर दबाव बढ़ सकता है।
- जर्मनी: 2 से 6 नवंबर के बीच कई शहरों में प्रदर्शन प्रस्तावित हैं। इसके अलावा 14 नवंबर को ट्रेड यूनियनों और 20 नवंबर को युवाओं की हड़ताल की तैयारी है।
- स्पेन: 11 नवंबर को बड़ी हड़ताल की योजना बनाई जा रही है।
- ब्रिटेन: 20 नवंबर को प्रस्तावित हड़ताल के पीछे महंगाई, रोजमर्रा के खर्च और आर्थिक परेशानियों को प्रमुख कारण बताया गया है।
महंगाई और बेरोजगारी से बढ़ रही लोगों की परेशानी
1. महंगा होता जीवनयापन: यूरोप के कई देशों में लोगों को महंगाई, कम वेतन, बेरोजगारी और महंगे मकानों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और सरकारी बजट में कटौती ने भी आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
2. ईंधन और गैस की कीमतों में उछाल: उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में ईंधन महंगाई करीब 2% थी, जो सितंबर में बढ़कर 8.3% हो गई। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में 49.5% और गैस की थोक कीमतों में करीब 140% की वृद्धि बताई गई। इससे घरों और कारोबारों का खर्च बढ़ा है।
3. बेरोजगारी का दबाव: एक साल में बेरोजगार लोगों की संख्या में 33% की बढ़ोतरी का दावा किया गया है। युवाओं में बेरोजगारी दर 15.5% बताई गई है। कमाई की तुलना में खर्च तेजी से बढ़ने से परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
4. मकान और किराए की बढ़ती कीमतें: यूरोपीय संघ में मकानों की कीमतों में 4.7% और किराए में 3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे खासतौर पर युवाओं और कम आय वाले परिवारों के लिए घर खरीदना या किराए पर रहना मुश्किल हो रहा है।
कुल मिलाकर, यूरोप में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आवास की समस्या ने लोगों की नाराजगी बढ़ाई है। अलग-अलग देशों में आंदोलन के मुद्दे भले ही अलग हों, लेकिन आर्थिक दबाव और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष कई जगह प्रदर्शनों की बड़ी वजह बन रहा है।