UAE के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमला, फुटेज में जानें होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव, दुनिया चिंतित
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और खाड़ी देशों के बीच जारी विवाद अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट तक पहुंच गया है। हाल के दिनों में ईरान की ओर से जहाजों की आवाजाही को लेकर सख्त बयान और नई निगरानी व्यवस्था की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अब इस समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और जहाजों की आवाजाही के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी में है।
इसी बीच UAE और ओमान के आसपास समुद्री गतिविधियों पर खतरा बढ़ने लगा है। हाल ही में ओमान के पास एक भारतीय जहाज पर हमला हुआ, जिसकी UAE ने कड़ी निंदा की। UAE ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब UAE के अल धफरा इलाके में स्थित Barakah Nuclear Energy Plant के बाहर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में प्लांट के बाहरी हिस्से में लगे एक बिजली जनरेटर में आग लग गई। हालांकि UAE प्रशासन ने साफ किया कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ और रेडिएशन स्तर पूरी तरह सामान्य हैं। अधिकारियों के मुताबिक न्यूक्लियर प्लांट सुरक्षित है और बिजली उत्पादन पर भी कोई असर नहीं पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन, जापान और यूरोप जैसे कई देश इस मार्ग से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर हैं। ऐसे में समुद्री व्यापार बाधित होने से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने समुद्री मार्ग की निगरानी के लिए नई व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत गुजरने वाले जहाजों को ईरानी नियमों का पालन करना पड़ सकता है। कई पश्चिमी देशों ने इस पर चिंता जताई है और इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ बताया है।
हालात को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र में समुद्री संघर्ष और गहरा सकता है।