मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के पार, वीडियो में देंखे वैश्विक बाजारों में हलचल तेज
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 126.31 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। हालांकि बाद में इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड करता नजर आया।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में इस तेजी ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए चरण में पहुंच गया है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को आज ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई से जुड़ी एक अहम ब्रीफिंग दी जाएगी। इस ब्रीफिंग में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और संभावित रणनीतिक विकल्पों पर चर्चा होने की संभावना है।
उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा ईरान के खिलाफ “छोटे लेकिन अत्यंत ताकतवर हमलों” की योजना तैयार किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इन संभावित कार्रवाइयों का उद्देश्य किसी बड़े और लंबे युद्ध को शुरू करना नहीं है, बल्कि ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाकर उसे वार्ता की मेज पर वापस लाना बताया जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात क्षेत्रों में से एक है। किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या समुद्री मार्गों में बाधा से आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखाई देता है।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने बढ़ती तेल कीमतों पर टिप्पणी करते हुए तंज कसा और कहा कि “अगला पड़ाव 140 डॉलर प्रति बैरल होने जा रहा है।” उनके इस बयान को पश्चिमी देशों की नीतियों पर अप्रत्यक्ष आलोचना के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव न केवल राजनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति पैदा कर रहा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार और अधिक अस्थिर हो सकता है, जिससे महंगाई और ऊर्जा संकट की स्थिति और गंभीर हो सकती है।