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Christa Pike Execution: दो बार दिया गया मौत का इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही महिला; टेनेसी में सभी फांसी पर रोक
 

 

अमेरिका के टेनेसी राज्य में मौत की सजा पाने वाली क्रिस्टा गेल पाइक को बुधवार को घातक इंजेक्शन देकर मौत की सजा देने की कोशिश की गई, लेकिन प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी। अधिकारियों ने उन्हें पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दीं, इसके बावजूद उनकी सांसें चलती रहीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वह बेहोशी की हालत में सांस ले रही थीं और उनकी खर्राटे जैसी आवाज भी सुनाई दे रही थी। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। 


दो इंजेक्शन के बाद भी नहीं रुकी सांस
रिपोर्टों के मुताबिक, पाइक को पहला घातक इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद दूसरी खुराक दी गई। इसके बावजूद वह जिंदा रहीं और प्रक्रिया को रोकना पड़ा।
CNN की रिपोर्टिंग में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूसरी कोशिश के बाद भी पाइक की सांसें चल रही थीं और कमरे में उनकी खर्राटे जैसी आवाज सुनाई दे रही थी। 
उनके वकीलों ने बाद में बताया कि पाइक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें जीवनरक्षक चिकित्सा उपचार दिया जा रहा था। 
टेनेसी में इस साल की बाकी मौत की सजाएं रोकी गईं
घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने राज्य में इस साल होने वाली बाकी सभी मौत की सजाओं पर रोक लगा दी है। साथ ही घटना की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद घातक इंजेक्शन प्रभावी क्यों नहीं हुआ। (
यह घटना टेनेसी में मौत की सजा की प्रक्रिया को लेकर नई जांच का कारण बनी है। इसी साल राज्य में एक और execution attempt भी विवादों में रहा था। 

1995 में 19 साल की सहपाठी की हत्या का मामला
क्रिस्टा पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। अपराध के समय पाइक 18 साल की थीं।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी के पास बुलाया गया था, जहां उसके साथ मारपीट की गई और उसकी हत्या कर दी गई। पाइक को बाद में मौत की सजा सुनाई गई।
अगर बुधवार की execution सफल होती, तो पाइक टेनेसी में दो सदी से अधिक समय बाद मौत की सजा पाने वाली पहली महिला बनतीं। 
वकीलों ने पहले ही जताई थी चिंता
पाइक के कानूनी प्रतिनिधियों ने execution से पहले उनकी नसों और चिकित्सा स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। CNN की रिपोर्टिंग के अनुसार, उनके वकीलों ने आशंका जताई थी कि नसों में दवा पहुंचाने में समस्या आ सकती है। 
घटना के बाद वकीलों ने कहा कि पाइक को गंभीर शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें अस्पताल में उपचार की जरूरत पड़ी। 
अब जांच में सामने आएगा क्या हुआ
टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन का कहना है कि अधिकारियों ने अदालत से मंजूर execution protocol के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की थी। लेकिन दो खुराक दिए जाने के बाद भी पाइक की मौत नहीं हुई।
अब स्वतंत्र जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि दवा के प्रशासन, नसों तक पहुंच या execution protocol में आखिर किस स्तर पर समस्या आई। फिलहाल राज्य ने आगे की executions रोक दी हैं।