'कोरोना के बाद नई आफत' जानिए आखिर क्या हैं White Lung Syndrome, जो बना रहा हैं 3 से 8 साल के बच्चों के शिकार
विश्व न्यूज डेस्क !!! चीन में बच्चों को एक और गंभीर बीमारी अपना शिकार बना रही है, जिसे व्हाइट लंग सिंड्रोम मिस्टीरियस निमोनिया और वॉकिंग निमोनिया कहा जाता है। आपको बता दें कि यह बीमारी 3 से 8 साल के बच्चों को अपना शिकार बना रही है और सिर्फ चीन ही नहीं, नीदरलैंड, अमेरिका और डेनमार्क में भी इस बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने चीन में फैल रही इस बीमारी (व्हाइट लंग सिंड्रोम) को लेकर राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, उत्तराखंड, हरियाणा और तमिलनाडु को अलर्ट जारी किया है और साथ ही सांस के मरीजों के लिए भी स्वास्थ्य विभाग तैयार है. बीमारी. रहने की हिदायत दी. बता दें कि चीनी (वॉकिंग निमोनिया) अधिकारी इस बीमारी को मिस्टीरियस (चीन निमोनिया प्रकोप) निमोनिया बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है ये बीमारी और क्या हैं इसके लक्षण...
क्या है व्हाइट लंग सिंड्रोम यानी रहस्यमयी निमोनिया?
बता दें कि अभी तक इस बीमारी के फैलने के कारणों का पता नहीं चल पाया है और न ही चीन ने इस बीमारी को लेकर कोई डेटा जारी किया है. इस बीमारी को रहस्यमयी निमोनिया कहा जाता है और यह बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलता है। दरअसल, इसे रहस्यमयी बीमारी इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि निमोनिया में खांसी की समस्या तो होती है, लेकिन इस बीमारी में फेफड़ों में गोल-गोल चकत्ते बन जाते हैं। आपको बता दें कि व्हाइट लंग सिंड्रोम में बच्चों की छाती में एक तरह का सफेद धब्बा हो जाता है और इसका पता एक्स-रे लेने के बाद ही चलता है। इस बीमारी से प्रभावित बच्चों को सांस लेने से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
जानिए क्या हैं व्हाइट लंग सिंड्रोम के लक्षण
- बुखार
- खांसी की समस्या
- श्वसन तंत्र की सूजन
- फेफड़ों में सूजन की समस्या
- गले में खराश के साथ दर्द होना
बच्चे क्यों होते हैं इस बीमारी का शिकार?
दरअसल, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है और यही एक बड़ा कारण है जिसकी वजह से यह बीमारी बच्चों को प्रभावित कर रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह सिर्फ बच्चों पर ही हमला करेगी, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उन्हें भी यह बीमारी अपनी चपेट में ले सकती है। अंदर आएं
जानिए क्या है WHO की गाइडलाइन
- हाथ साफ रखें.
- समय पर टीका अवश्य लगवाएं।
- बीमार व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें
- इसके अलावा जब आप बीमार हों तो खुद को अलग कर लें
- साथ ही समय पर आवश्यक परीक्षण कराएं और चिकित्सा सहायता लें।