दक्षिण चीन सागर विवाद पर चीन का कड़ा रुख, 14 देशों के संयुक्त बयान से नाराज; जापानी राजनयिक को किया तलब
दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को लेकर 14 देशों के संयुक्त बयान के बाद चीन और जापान के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। चीन ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बीजिंग स्थित जापानी दूतावास के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया है। चीन का आरोप है कि संयुक्त बयान में उसकी संप्रभुता और समुद्री हितों को लेकर गलत और भ्रामक टिप्पणियां की गई हैं।
चीन के इस कदम ने एक बार फिर दक्षिण चीन सागर को लेकर क्षेत्रीय विवाद और अंतरराष्ट्रीय तनाव को सुर्खियों में ला दिया है। यह इलाका लंबे समय से कई देशों के बीच क्षेत्रीय दावों और सामरिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े 14 देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान, समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया। बयान में समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण और नियम-आधारित व्यवस्था के तहत करने की अपील भी की गई।
चीन ने इस बयान को अपने खिलाफ बताया और कहा कि कुछ देश बाहरी ताकतों के साथ मिलकर क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।
जापानी राजनयिक को क्यों किया गया तलब?
चीन के विदेश मंत्रालय ने जापानी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। चीन का कहना है कि जापान ने संयुक्त बयान का समर्थन कर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने का काम किया है।
चीनी अधिकारियों ने जापान से आग्रह किया कि वह ऐसे कदमों से बचे, जो दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही बीजिंग ने दोहराया कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े मुद्दों का समाधान संबंधित देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए।
दक्षिण चीन सागर क्यों है इतना अहम?
दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। हर साल वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में तेल, प्राकृतिक गैस और समुद्री संसाधनों के बड़े भंडार होने का अनुमान है।
चीन इस समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके विभिन्न हिस्सों पर दावा जताते हैं। यही वजह है कि यह क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र बना हुआ है।
बढ़ सकता है कूटनीतिक तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि 14 देशों के संयुक्त बयान और उसके बाद चीन की तीखी प्रतिक्रिया से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका, जापान और अन्य सहयोगी देश लगातार नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं, जबकि चीन अपने क्षेत्रीय दावों पर कायम है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संबंधित देशों के बीच और कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। फिलहाल चीन का जापानी राजनयिक को तलब करना इस बात का संकेत है कि बीजिंग दक्षिण चीन सागर से जुड़े मामलों पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय टिप्पणी को बेहद गंभीरता से ले रहा है।