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कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग तेज, वीडियो में देंखे जनमत संग्रह की तैयारी का दावा

 

कनाडा के पश्चिमी प्रांत Alberta में अलगाववादी आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। हाल के दिनों में इस प्रांत को अलग देश बनाने की मांग तेज हो गई है, और आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि उन्होंने जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के लिए आवश्यक समर्थन जुटा लिया है। इस घटनाक्रम ने कनाडा की संघीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।अलगाववादी नेताओं के अनुसार, उन्होंने करीब 3 लाख नागरिकों के हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि जनमत संग्रह की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कानूनी तौर पर लगभग 1 लाख 78 हजार हस्ताक्षरों की आवश्यकता थी। आंदोलन के प्रमुख नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इस उपलब्धि को “ऐतिहासिक दिन” बताते हुए कहा है कि अब यह आंदोलन अपने अगले चरण में प्रवेश कर चुका है।

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हालांकि, विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि केवल हस्ताक्षरों की संख्या पूरी हो जाना जनमत संग्रह की अंतिम मंजूरी की गारंटी नहीं देता। कनाडा के चुनाव आयोग को अब इन सभी हस्ताक्षरों की सत्यता और वैधता की जांच करनी होगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि जनमत संग्रह को आगे बढ़ाया जा सकता है या नहीं।इसके साथ ही इस प्रक्रिया पर फिलहाल कानूनी अड़चनें भी बनी हुई हैं। अदालत के आदेश के कारण जनमत संग्रह की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगी हुई है, जिससे मामला और जटिल हो गया है। न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक किसी भी प्रकार की औपचारिक वोटिंग प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।

अलगाववादी आंदोलन के समर्थकों का तर्क है कि अल्बर्टा को कनाडा से अधिक स्वायत्तता या पूर्ण स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, क्योंकि वे लंबे समय से आर्थिक नीतियों, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और संघीय सरकार के निर्णयों से असंतुष्ट हैं। वहीं, विरोधी पक्ष का कहना है कि इस तरह के आंदोलन देश की एकता और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।

कनाडा सरकार की ओर से फिलहाल इस मामले पर संयमित प्रतिक्रिया दी गई है और कहा गया है कि सभी प्रक्रियाएं कानून और संविधान के दायरे में ही आगे बढ़ेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जनमत संग्रह आगे बढ़ता है, तो यह कनाडा के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ साबित हो सकता है।

यदि भविष्य में जनमत संग्रह होता है और परिणाम अल्बर्टा के पक्ष में आता है, तो यह प्रांत कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। हालांकि, अभी यह प्रक्रिया प्रारंभिक और कानूनी जांच के चरण में है, और अंतिम निर्णय अदालत और चुनाव आयोग की समीक्षा पर निर्भर करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।