2035 तक दुनिया की 10 बड़ी कार कंपनियों में से 6 चीन की हो सकती हैं, KPMG रिपोर्ट में बड़ा दावा
दुनियाभर के ऑटोमोबाइल बाजार में तेजी से बदलाव हो रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सॉफ्टवेयर तकनीक ने कार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। अब तक अमेरिका, जर्मनी और जापान की कंपनियों का वैश्विक बाजार में मजबूत दबदबा रहा है, लेकिन चीन की कंपनियां तेजी से इस स्थिति को बदलने की कोशिश कर रही हैं।
कंसल्टिंग फर्म KPMG की ग्लोबल ऑटोमोटिव एग्जीक्यूटिव रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2035 तक दुनिया की 10 सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में से 6 का मुख्यालय चीन में हो सकता है। यह अनुमान वैश्विक कार बाजार में चीन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। हालांकि, यह भविष्य से जुड़ा आकलन है, कोई निश्चित परिणाम नहीं।
इलेक्ट्रिक कारों और बैटरी तकनीक से चीन को फायदा
चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों और एडवांस बैटरी तकनीक के विकास में बड़े स्तर पर निवेश किया है। इसका फायदा वहां की कंपनियों को उत्पादन लागत कम रखने और नए मॉडल तेजी से बाजार में उतारने में मिल रहा है।
चीन की BYD, Geely और Xiaomi जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों के साथ-साथ स्मार्ट फीचर्स और डिजिटल तकनीक पर भी ध्यान दे रही हैं। इससे वे घरेलू बाजार के अलावा दूसरे देशों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
रिपोर्ट में शामिल सर्वे के अनुसार, करीब 48% अधिकारियों का मानना है कि 2035 तक वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक हो सकती है।
पुरानी कार कंपनियों के सामने बढ़ती चुनौती
अमेरिका की Ford, जर्मनी की Volkswagen और जापान की Toyota जैसी स्थापित कंपनियों को बदलते बाजार के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ रही है। चीनी कंपनियों की कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और तेजी से उत्पाद विकसित करने की क्षमता पारंपरिक वाहन निर्माताओं के लिए चुनौती बन रही है।
अब कार कंपनियों के बीच मुकाबला केवल इंजन, डिजाइन और कीमत तक सीमित नहीं है। ग्राहकों की पसंद में डिजिटल सुविधाएं, कनेक्टिविटी और ड्राइविंग को आसान बनाने वाली तकनीक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
भविष्य की कारों में सॉफ्टवेयर और AI की अहम भूमिका
KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स यानी ऐसी गाड़ियां, जिनकी कई सुविधाएं सॉफ्टवेयर के जरिए नियंत्रित और अपडेट की जा सकती हैं, ऑटोमोबाइल उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेंगी।
आधुनिक कारों में कई तरह की तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है:
- AI आधारित फीचर्स: ड्राइविंग अनुभव और वाहन की सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद।
- एडवांस्ड ड्राइविंग असिस्टेंस: सेंसर और कैमरों की मदद से ड्राइवर को संभावित खतरों के प्रति सतर्क करना।
- स्मार्ट कॉकपिट: डिजिटल डिस्प्ले, वॉयस कमांड और कनेक्टेड सुविधाएं।
- सॉफ्टवेयर अपडेट: वाहन की कुछ सुविधाओं में समय के साथ सुधार और नए फीचर्स जोड़ने की क्षमता।
रिपोर्ट में शामिल 51% अधिकारियों का मानना है कि कारों में उपलब्ध डिजिटल सुविधाएं ग्राहकों के खरीदारी संबंधी फैसलों को प्रभावित करेंगी।
चीन की कंपनियां क्यों बना सकती हैं बढ़त?
चीन की ऑटो कंपनियों को बड़े घरेलू बाजार, बैटरी उत्पादन की मजबूत व्यवस्था और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के अनुभव से फायदा मिलता है। कई कंपनियां वाहन के हार्डवेयर के साथ सॉफ्टवेयर और डिजिटल सेवाओं पर भी काम कर रही हैं।
इसके अलावा, तेज उत्पादन क्षमता और लागत पर नियंत्रण उन्हें प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वाहन पेश करने में मदद कर सकता है। हालांकि, दूसरे देशों में आयात शुल्क, व्यापार प्रतिबंध, स्थानीय नियम और उपभोक्ताओं की पसंद चीनी कंपनियों के विस्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
2035 तक ऑटोमोबाइल बाजार में क्या बदल सकता है?
KPMG की रिपोर्ट वैश्विक ऑटो उद्योग में संभावित बदलाव की ओर संकेत करती है। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी तकनीक, AI और डिजिटल कनेक्टिविटी में निवेश कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
यदि चीन की कंपनियां अपनी तकनीकी और उत्पादन संबंधी बढ़त बनाए रखती हैं, तो वैश्विक बाजार में उनका प्रभाव और बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका, यूरोप और जापान की स्थापित कंपनियां भी नई तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों में निवेश करके मुकाबले में बनी रह सकती हैं।
इसलिए 2035 तक ऑटोमोबाइल बाजार में चीन की भूमिका बढ़ने की संभावना जरूर है, लेकिन वास्तविक तस्वीर कंपनियों की तकनीकी प्रगति, लागत, व्यापार नीतियों और ग्राहकों की बदलती जरूरतों पर निर्भर करेगी।