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Britain-Saudi Defence: सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए टाइफून फाइटर जेट भेजेगा ब्रिटेन, हूती हमलों पर नजर

 

ब्रिटेन ने सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने टाइफून लड़ाकू विमान भेजने का ऐलान किया है। इन विमानों का इस्तेमाल हूती विद्रोहियों की ओर से किए जाने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों से सऊदी शहरों, हवाई क्षेत्र और तेल प्रतिष्ठानों की रक्षा के लिए किया जाएगा। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तैनाती का उद्देश्य सुरक्षा करना है, न कि यमन में हूती ठिकानों पर हमला करना।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हमले की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे इनकार कर दिया। इसके बाद ब्रिटेन ने सऊदी अरब को अतिरिक्त सैन्य सहायता देने का फैसला किया।

चार यूरोपीय देशों ने मिलकर बनाया टाइफून विमान

यूरोफाइटर टाइफून एक बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है। इसका इस्तेमाल दुश्मन के विमानों को रोकने, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा करने और जरूरत पड़ने पर जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया जा सकता है।

इसका आधुनिक रडार दूर से दूसरे विमानों का पता लगाने में मदद करता है। यह हवा में मिसाइलों के जरिए दुश्मन के विमानों को निशाना बनाने में भी सक्षम है।

टाइफून को यूरोप के चार देशों—ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और स्पेन—के सहयोग से विकसित किया गया था। यह किसी एक देश की अकेली परियोजना नहीं है।

ब्रिटेन ने सऊदी अरब की मदद क्यों की?

ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों की निंदा की। उन्होंने खास तौर पर रियाद के एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय तनाव बढ़ा रहे हैं।

स्ट्रीटिंग के मुताबिक, उन्होंने ब्रिटेन की ओर से अतिरिक्त सैन्य सहायता को मंजूरी दी है। रॉयल एयर फोर्स के टाइफून विमान सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र को ड्रोन और मिसाइल हमलों से सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।

उन्होंने चेतावनी दी कि हूती हमलों से पश्चिम एशिया की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों पर भी असर पड़ने की आशंका है, जिसका प्रभाव ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

पहले भी सऊदी अरब की मदद कर चुका है ब्रिटेन

सऊदी अरब के अनुरोध पर ब्रिटेन सितंबर में भी सैन्य सहायता देने पर सहमत हुआ था। उस समय रॉयल एयर फोर्स के वॉयेजर विमान की मदद देने की घोषणा की गई थी। वॉयेजर का इस्तेमाल हवा में दूसरे विमानों में ईंधन भरने के लिए किया जाता है।

अब ब्रिटेन टाइफून लड़ाकू विमानों के अलावा एटलस A400M परिवहन विमान और सैन्य सलाहकार भी भेजने की योजना बना रहा है। परिवहन विमान सऊदी अरब के भीतर सैन्य उपकरण पहुंचाने में मदद करेगा, जबकि ब्रिटिश सैन्य सलाहकार सऊदी अधिकारियों को सहयोग देंगे।

अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच बातचीत की चर्चा

एक्सिओस की 16 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच एक समझौते की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया कि हूतियों ने लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाने का भरोसा दिया था।

बताया गया कि बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में हुई थी। इसमें बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर भी चर्चा हुई थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हूतियों के साथ सीधे बातचीत होने की बात कही थी। हालांकि, किसी औपचारिक गुप्त समझौते की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई थी।

पाकिस्तान ने यमन में सेना भेजने से किया इनकार

यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने पाकिस्तान से भी सैन्य मदद मांगी थी। हालांकि, पाकिस्तान ने यमन में लड़ने के लिए अपनी सेना या सैन्य संसाधन भेजने से इनकार कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने कहा कि उसकी सेना सऊदी अरब की जमीन की रक्षा के लिए तैनात की जा सकती है, लेकिन वह किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी।

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच रक्षा सहयोग को लेकर हुए समझौते को कुछ विश्लेषकों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम बताया है। इसे लेकर ‘मुस्लिम नाटो’ जैसी उपमाओं का भी इस्तेमाल किया गया है।

ब्रिटेन की नई सैन्य तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। हालांकि, ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके टाइफून विमानों की भूमिका सऊदी अरब की रक्षा तक सीमित रहेगी और वे यमन में हूती ठिकानों पर हमले नहीं करेंगे।