BREAKING:तिब्बत में 7 तीव्रता के भूकंप से दहशत, 16 की मौत और 32 घायल; पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी कांपी धरती
तिब्बत में 7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 8:03 बजे आए भूकंप में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल बताए गए हैं। भूकंप के झटकों से स्थानीय इलाकों में दहशत फैल गई। वहीं, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।
चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के अनुसार, भूकंप का केंद्र तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे था। यह स्थान तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर है। भूकंप की तीव्रता और कम गहराई के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए गए।
इसी दौरान पाकिस्तान में 4.9 और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए। इन घटनाओं ने हिमालय और आसपास के क्षेत्रों में भूकंप के खतरे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
तिब्बत में पहले भी भूकंप से हो चुकी है भारी तबाही
तिब्बत भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार हलचल होती रहती है। इन प्लेटों के टकराव से हिमालय पर्वतमाला का निर्माण हुआ है। यही भूगर्भीय गतिविधियां इस क्षेत्र में भूकंप आने की प्रमुख वजह हैं।
जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस घटना में तिब्बत में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी, जबकि पड़ोसी नेपाल में भी 13 लोगों की जान चली गई थी। इसके झटके उत्तर भारत सहित दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
इससे पहले वर्ष 2010 में चीन के छिंगहाई प्रांत के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इस आपदा में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे।
अगस्त में बाढ़ और भूस्खलन से भी हुआ था नुकसान
तिब्बत में इस साल अगस्त में भी एक बड़ी प्राकृतिक आपदा सामने आई थी। 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हो गया।
बाद में पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ा, जिससे कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग क्षेत्र में 43 लोगों की मौत हुई थी और 519 लोग लापता बताए गए थे। नेपाल में भी बाढ़ से भारी नुकसान की खबर सामने आई थी।
आखिर तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
तिब्बत में भूकंप आने की मुख्य वजह पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल है। इसकी प्रक्रिया को इस तरह समझा जा सकता है:
- दो बड़ी प्लेटें: भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना को प्रभावित करती हैं।
- लगातार टकराव: भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट पर दबाव डालती है।
- चट्टानों में तनाव: इस दबाव के कारण जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों और भूगर्भीय दरारों में तनाव जमा होता रहता है।
- अचानक हलचल: जब चट्टानें इस तनाव को सहन नहीं कर पातीं और अचानक खिसकती हैं, तो ऊर्जा निकलती है और भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
- भूकंप का खतरा: हिमालय और तिब्बत का क्षेत्र सक्रिय भूगर्भीय संरचनाओं से जुड़ा है। इसी कारण यहां भूकंप का जोखिम बना रहता है।
लगातार होने वाली भूगर्भीय हलचल के कारण तिब्बत और हिमालय के आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का खतरा बना रहता है। हालांकि, किसी बड़े भूकंप के बाद अगला भूकंप कब और कितनी तीव्रता का आएगा, इसकी सटीक भविष्यवाणी फिलहाल संभव नहीं है।