अंतरराष्ट्रीय बाजार में उबाल: $106 पर कच्चा तेल, जानिए आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा
कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही पर पड़ा है। शिपिंग रूट बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से ऊपर जा रहे हैं।
ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हालांकि, भारत के लिए कच्चे तेल की वास्तविक लागत इससे भी ज्यादा है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है।
भारत के लिए 25% महंगा हुआ कच्चा तेल
PPAC के आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर को भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल रही। वहीं, अगस्त में इसकी औसत कीमत 90.19 डॉलर, जुलाई में 82.04 डॉलर और जून में 83.22 डॉलर प्रति बैरल थी।
इस तरह जून-जुलाई के मुकाबले भारत के लिए कच्चे तेल की लागत करीब 25 फीसदी तक बढ़ चुकी है। जुलाई में जहां भारत करीब 82 डॉलर प्रति बैरल की औसत कीमत पर क्रूड खरीद रहा था, वहीं अब यह लागत 106 डॉलर से ज्यादा हो गई है।
मई में अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान भी भारत के क्रूड बास्केट की औसत कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा स्थिति में कीमतें फिर उसी स्तर के आसपास पहुंचती दिखाई दे रही हैं।
होर्मुज से घटकर रह गई जहाजों की आवाजाही
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी बड़ी गिरावट आई है।
शिपिंग डेटा के अनुसार, पिछले 10 दिनों में इस समुद्री मार्ग से औसतन सिर्फ 10 मालवाहक जहाज प्रतिदिन गुजर पाए हैं। मई के बाद यह सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है।
एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को 10 दिन का मूविंग एवरेज करीब 10 जहाज रहा। इससे पहले शुक्रवार को यह आंकड़ा 15 से ज्यादा और शनिवार को करीब 13 था। शनिवार को सिर्फ 2 जहाज और रविवार को 6 जहाज होर्मुज से गुजर पाए।
ब्रेंट और WTI क्रूड भी 100 डॉलर की ओर
मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर 2:20 बजे के आसपास ब्रेंट क्रूड 0.75 फीसदी की तेजी के साथ 97.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
वहीं, WTI क्रूड में 1.78 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई और यह 93.11 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहा और सप्लाई प्रभावित हुई तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का दबाव बढ़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में लंबे समय तक आवाजाही बाधित रहने पर वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर देश की तेल कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। अगर मौजूदा तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
हूती हमलों से बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कुछ रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अभा व जिजान में सऊदी अरामको की तेल सुविधाएं शामिल बताई गई हैं।
मध्य पूर्व में संघर्ष का दायरा बढ़ने की स्थिति में तेल सप्लाई पर और दबाव पड़ सकता है, जिसका सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।