अमेरिका की परमाणु नीति में बड़ा बदलाव! चीन-रूस के बढ़ते तनाव के बीच छोटे एटम बम के इस्तेमाल की तैयारी
अमेरिका चीन और रूस के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच अपनी परमाणु नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ऐसी नई रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें पारंपरिक बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे परमाणु हथियारों यानी टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन्स के इस्तेमाल का विकल्प भी शामिल किया जा सकता है। इस बदलाव का उद्देश्य बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में अमेरिका को सीमित सैन्य संघर्ष की स्थिति में अधिक विकल्प उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की प्रस्तावित रणनीति में ऐसे परमाणु हथियारों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विनाश के बजाय किसी विशेष सैन्य लक्ष्य या सीमित युद्ध क्षेत्र में किया जा सके। इन्हें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कहा जाता है। हालांकि ये हथियार रणनीतिक परमाणु बमों की तुलना में अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले होते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से भी भारी तबाही और लंबे समय तक पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है।
चीन और रूस से बढ़ता दबाव
अमेरिका की परमाणु नीति में संभावित बदलाव के पीछे चीन और रूस के साथ बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। रूस के पास दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हथियार भंडारों में से एक है, जबकि चीन भी तेजी से अपने परमाणु हथियारों और मिसाइल क्षमताओं का विस्तार कर रहा है। ऐसे में अमेरिका अपनी सैन्य रणनीति को इन दोनों देशों की बढ़ती क्षमताओं के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रहा है।
नई रणनीति के तहत जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे या सीमित युद्ध क्षेत्र में किया जा सकता है। इसका मकसद यह माना जा रहा है कि अमेरिका के पास ऐसी स्थिति में भी जवाब देने का विकल्प रहे, जहां पूर्ण स्तर के परमाणु हमले की जरूरत न हो।
परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर बढ़ेगी चिंता
हालांकि टैक्टिकल परमाणु हथियारों को अपेक्षाकृत छोटे और सीमित प्रभाव वाले हथियारों के रूप में देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के बीच इनके इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। आशंका है कि किसी संघर्ष में छोटे परमाणु हथियार के इस्तेमाल के बाद स्थिति तेजी से बड़े परमाणु युद्ध में बदल सकती है।
अमेरिका की परमाणु नीति में यह संभावित बदलाव ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब दुनिया में कई क्षेत्रों में सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है। रूस, चीन और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के चलते परमाणु हथियारों को लेकर बहस भी तेज हो रही है। ऐसे में पेंटागन की प्रस्तावित रणनीति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।