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अमेरिका में ट्रंप को बड़ा झटका: मिडटर्म चुनाव हारे, डेमोक्रेट्स ने छीना बहुमत; यूएस पॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव

 

अमेरिका की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रंप की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि अब उनके लिए अपने राजनीतिक और आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाना पहले के मुकाबले काफी चुनौतीपूर्ण होगा।

3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजे 4 नवंबर को सामने आए। इन चुनावों को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले दो वर्षों के कामकाज पर जनता की राय के तौर पर देखा जा रहा था। नतीजों में मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ मतदान करते हुए डेमोक्रेट्स को बड़ी जीत दिलाई। अमेरिकी राजनीति में इस बदलाव को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट दोनों पर जमाया कब्जा

अमेरिकी चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे पहले रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों पर नियंत्रण था।सीनेट में डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे राज्यों में जीत दर्ज की, जहां रिपब्लिकन पार्टी को मजबूत माना जाता था। टेक्सास, साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, ओहायो, कंसास, आयोवा और मेन जैसे राज्यों में हुए नतीजों ने चुनाव की तस्वीर बदल दी।हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी डेमोक्रेट्स ने दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत छीन लिया। इस जीत के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में ट्रंप प्रशासन के फैसलों को चुनौती देने की मजबूत स्थिति मिल गई है।

ट्रंप के लिए क्यों बढ़ेंगी मुश्किलें?

अमेरिका में राष्ट्रपति के पास कई अहम कार्यकारी अधिकार होते हैं, लेकिन कानून बनाने और सरकारी खर्च से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में कांग्रेस की भूमिका बेहद अहम होती है।

अब जब कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत है, तो ट्रंप प्रशासन के कई प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में मुश्किल आ सकती है। विपक्षी पार्टी सरकारी नीतियों पर सवाल उठा सकती है और प्रशासन के कामकाज की जांच भी करा सकती है।

इसके अलावा ट्रंप की ओर से महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर नियुक्तियों को मंजूरी दिलाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डेमोक्रेट्स अब संसद की समितियों के जरिए सरकार के फैसलों और अधिकारियों से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच कर सकते हैं।

महंगाई और ईरान युद्ध बना चुनाव का बड़ा मुद्दा

चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के पीछे कई अहम मुद्दे रहे। इनमें महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें, ईरान के साथ युद्ध और सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर उठे सवाल प्रमुख रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में अमेरिकी मतदाता महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत से परेशान थे। लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप प्रशासन उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर करेगा, लेकिन बढ़ती कीमतों ने सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ा दी।

इसके अलावा ईरान के साथ युद्ध और ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर भी मतदाताओं में असंतोष देखने को मिला। इन मुद्दों का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ा और डेमोक्रेट्स को उन राज्यों में भी सफलता मिली, जहां पहले रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा था।

ट्रंप ने चुनावी नतीजों को स्वीकार किया

मिडटर्म चुनाव में पार्टी की हार के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने नतीजों को स्वीकार करने की बात कही। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह खुद चुनाव में उम्मीदवार होते तो रिपब्लिकन पार्टी बड़ी जीत हासिल करती।

ट्रंप ने अपनी पार्टी की हार के लिए कुछ रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रदर्शन को भी जिम्मेदार ठहराया। दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे अमेरिकी जनता की बड़ी राजनीतिक जीत बताया।

अब ट्रंप सरकार के खिलाफ हो सकती हैं कई जांच

डेमोक्रेट्स की जीत का सबसे बड़ा राजनीतिक असर आने वाले दो वर्षों में दिखाई दे सकता है। विपक्षी पार्टी ट्रंप प्रशासन के कामकाज को लेकर संसदीय जांच शुरू कर सकती है।

इसके तहत सरकारी अधिकारियों, प्रशासनिक फैसलों और राष्ट्रपति से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच के लिए सुनवाई और पूछताछ की जा सकती है। डेमोक्रेट्स ने पहले ही संकेत दिए हैं कि वे सरकार पर निगरानी बढ़ाएंगे और जरूरी मुद्दों पर जवाब मांगेंगे।

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के पास कानूनों को वीटो करने का अधिकार बना रहेगा। ऐसे में डेमोक्रेट्स के लिए अपने सभी प्रस्तावों को कानून में बदलना आसान नहीं होगा।

अमेरिकी राजनीति में बदलेगा सत्ता का समीकरण

मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने अमेरिका की राजनीति में नया समीकरण तैयार कर दिया है। अब ट्रंप को अपने कार्यकाल के बाकी दो साल में विपक्ष के साथ तालमेल बनाकर काम करना पड़ सकता है।

डेमोक्रेट्स के पास संसद में बहुमत होने से वे सरकारी नीतियों पर रोक लगाने, नियुक्तियों पर सवाल उठाने और प्रशासन से जवाब मांगने की मजबूत स्थिति में होंगे।

कुल मिलाकर, 2026 के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की यह जीत डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है। अब देखना होगा कि ट्रंप इस बदले हुए राजनीतिक माहौल में अपनी सरकार का एजेंडा किस तरह आगे बढ़ाते हैं।