आखिर कैसे साल 2065 तक खड़ा होगा भारत में युवा आबादी वाला संकट? UN ने जताई चिंता
भारत फिलहाल दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। लगभग 1.5 अरब की आबादी के साथ भारत वैश्विक जनसंख्या मानचित्र पर शीर्ष पर है। लेकिन यही विशाल जनसंख्या, जो आज संसाधनों के लिए संघर्ष और भीड़ का कारण बन रही है, आने वाले दशकों में तेज़ी से घटने की ओर भी बढ़ सकती है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की हालिया रिपोर्ट ने इस विषय पर गंभीर चिंता जताई है।
क्या है रिपोर्ट की मुख्य चेतावनी?
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी में साल 2065 के बाद गिरावट आने लगेगी। इसका प्रमुख कारण है गिरती हुई प्रजनन दर (Fertility Rate)। भारत की मौजूदा औसत जन्मदर 1.9 तक गिर चुकी है, जबकि स्थिर जनसंख्या बनाए रखने के लिए यह आंकड़ा 2.1 होना जरूरी है। अभी के लिए यह गिरावट संकट नहीं है क्योंकि आबादी का आधार बहुत बड़ा है, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन सकती है।
1960 से अब तक कितना बदला भारत?
रिपोर्ट में बताया गया है कि 1960 में भारत की जनसंख्या 43 करोड़ थी और तब एक महिला औसतन 6 बच्चों को जन्म दे रही थी। लेकिन अब सामाजिक और आर्थिक बदलावों के कारण महिलाएं कम बच्चे पैदा कर रही हैं। शिक्षा, परिवार नियोजन, आर्थिक जिम्मेदारियां और महिला सशक्तिकरण जैसे कारकों ने परिवारों के आकार को सीमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सोच में आया बदलाव: तीन पीढ़ियों का उदाहरण
रिपोर्ट का एक रोचक हिस्सा बिहार के एक परिवार की तीन पीढ़ियों की महिलाओं के अनुभवों पर आधारित है।
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सरस्वती देवी (64 वर्ष) बताती हैं कि उनके समय में बड़ा परिवार ही आदर्श माना जाता था। उनके खुद के 5 बेटे हैं। परिवार नियोजन को लेकर कोई जानकारी नहीं थी और बच्चे भगवान का आशीर्वाद माने जाते थे।
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अनीता (42 वर्ष), सरस्वती की बहू, कहती हैं कि उनके 6 बच्चे हैं लेकिन यह उनकी मर्जी नहीं थी। परिवार का दबाव, खासकर ‘बेटा चाहिए’ की सोच, इसका कारण रही।
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वहीं पूजा (26 वर्ष), अनीता की बेटी, एक नई सोच की प्रतिनिधि है। वह कहती हैं कि वह दो से ज्यादा बच्चे नहीं चाहती क्योंकि वह उन्हें बेहतर जीवन और सुविधाएं देना चाहती है।
भविष्य की चिंता और नीति निर्माण
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट कहती है कि यह बदलाव सकारात्मक है लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणामों पर सरकार को अब से सोचना शुरू करना होगा। आबादी घटने का असर श्रम शक्ति, अर्थव्यवस्था और वृद्ध जनसंख्या पर पड़ेगा। यदि सरकारें आज से शिक्षा, स्वास्थ्य और वृद्धजन कल्याण पर ध्यान दें तो आने वाला संकट एक अवसर में बदला जा सकता है। क्वालिटी पॉपुलेशन की दिशा में उठाए गए कदम भविष्य में भारत की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी होंगे। आज भारत जनसंख्या के उच्चतम स्तर पर है, लेकिन आने वाले समय में जनसंख्या गिरावट के दौर में प्रवेश करेगी। यह बदलाव जितना सामाजिक है, उतना ही नीति-निर्धारण का भी विषय है। 2065 के बाद की चुनौतियों से निपटने के लिए आज की तैयारी बेहद जरूरी है।