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जवाई बांध के ये FACTS जानकर रह जाएंगे हैरान VIDEO पानी के साथ तेंदुओं और प्रवासी पक्षियों का भी है ठिकाना

 

राजस्थान के पाली जिले में बना जवाई बांध अपनी कई खासियतों के कारण प्रदेश के दूसरे बांधों से अलग पहचान रखता है। एक तरफ यह पश्चिमी राजस्थान के महत्वपूर्ण जल स्रोतों में शामिल है, वहीं दूसरी तरफ इसके आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र तेंदुओं, मगरमच्छों और प्रवासी पक्षियों के लिए भी जाना जाता है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार जवाई बांध पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध माना जाता है।

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1957 में पूरा हुआ था बांध

जवाई बांध के निर्माण का इतिहास आजादी के आसपास के दौर से जुड़ा है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार बांध का निर्माण वर्ष 1946 में शुरू हुआ था और करीब 11 साल बाद 1957 में परियोजना पूरी हुई। इस बांध का निर्माण जोधपुर के तत्कालीन महाराजा उम्मेद सिंह के समय से जुड़ा माना जाता है। बांध का उद्देश्य जवाई नदी के पानी को नियंत्रित करके उसे सिंचाई और जलापूर्ति के लिए उपयोग करना था।

जवाई नदी है बांध का आधार

जवाई बांध जवाई नदी पर बनाया गया है, जो लूणी नदी की सहायक नदी है। बारिश के दौरान नदी में आने वाले पानी को बांध में संग्रहित किया जाता है। इससे शुष्क क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। बांध का जलाशय आसपास के क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और पाली जिले की जलापूर्ति में इसकी बड़ी भूमिका है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पाली शहर को जवाई बांध से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाता है।

जवाई की पहचान तेंदुओं से भी

जवाई बांध का नाम आज केवल पानी के कारण ही नहीं, बल्कि यहां के तेंदुओं के कारण भी देशभर में चर्चा में रहता है। जलाशय के आसपास मौजूद चट्टानी पहाड़ियां और प्राकृतिक गुफाएं तेंदुओं के लिए अनुकूल आवास उपलब्ध कराती हैं। जवाई क्षेत्र में तेंदुओं और स्थानीय ग्रामीण समुदाय के बीच लंबे समय से सह-अस्तित्व की चर्चा होती रही है। यही अनोखा प्राकृतिक वातावरण वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।

प्रवासी पक्षियों का भी ठिकाना

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार जवाई बांध सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों के लिए भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जलाशय के आसपास अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों को देखा जा सकता है। इस वजह से जवाई बांध पानी के साथ-साथ पक्षी प्रेमियों और प्रकृति पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है।

मगरमच्छ भी पाए जाते हैं

जवाई के जलाशय में मगरमच्छों की मौजूदगी भी दर्ज की जाती है। यानी एक ही क्षेत्र में जलाशय, पक्षी, मगरमच्छ और तेंदुओं का प्राकृतिक संसार देखने को मिलता है। यही विविधता जवाई को राजस्थान के दूसरे जलाशयों से अलग पहचान देती है।

जवाई सिर्फ बांध नहीं, एक पूरी कहानी है

जवाई बांध का इतिहास करीब सात दशक पुराना है। 1946 में शुरू हुआ निर्माण 1957 में पूरा हुआ और इसके बाद यह पश्चिमी राजस्थान की जल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। आज जवाई बांध पानी की जरूरत पूरी करने के साथ पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ा है। यहां का जलाशय और आसपास की पहाड़ियां यह दिखाती हैं कि किस तरह एक जल परियोजना समय के साथ किसी पूरे क्षेत्र की पहचान का हिस्सा बन सकती है।