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आखिर कब ओ किसने बनवाया जयपुर का 'जंतर-मंतर' ? 3 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में देखे 300 साल पुरानी चमत्कारी वेधशाला का इतिहास 

 

गुलाबी नगरी जयपुर सिर्फ अपनी आलीशान हवेलियों, किलों और रंग-बिरंगी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि एक ऐसे खगोलीय चमत्कार के लिए भी प्रसिद्ध है जिसे "जंतर मंतर" कहते हैं। यह स्थान विज्ञान, वास्तुकला और ज्योतिष का ऐसा अनोखा संगम है जो न सिर्फ भारत, बल्कि पूरे विश्व में अद्वितीय है।राजस्थान की राजधानी जयपुर के दिल में स्थित यह ऐतिहासिक वेधशाला आज भी सूर्य, चंद्रमा और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को सटीकता से बताने में सक्षम है। आइए जानते हैं कि आखिर जयपुर के जंतर मंतर का इतिहास क्या है, कब और किसने इसका निर्माण करवाया, और इसकी क्या खासियतें हैं जो इसे आज भी विज्ञान और पर्यटन का केंद्र बनाए हुए हैं।

<a href=https://youtube.com/embed/SB6YAxlTIXg?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/SB6YAxlTIXg/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Jantar Mantar Jaipur | जंतर-मंतर जयपुर, सूर्य घडी, सम्राट यंत्र, जय प्रकाश यंत्र, दिशा और राम यंत्र" width="695">
इतिहास: राजा का विज्ञान प्रेम
जंतर मंतर का निर्माण अठारहवीं सदी में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया था। वे न सिर्फ एक कुशल शासक थे, बल्कि खगोल शास्त्र (एस्ट्रोनॉमी) में गहरी रुचि रखते थे। मुगल सम्राट मोहम्मद शाह ने जब खगोलीय गणनाओं में असमानता और भ्रम देखा, तब उन्होंने सवाई जयसिंह को इस दिशा में काम करने के लिए कहा।जयसिंह द्वितीय ने यूरोप और अरब देशों से खगोलशास्त्र की किताबें मंगवाईं, विभिन्न तकनीकों का अध्ययन किया और उनके आधार पर भारत में पांच प्रमुख वेधशालाएं बनवाईं — दिल्ली, उज्जैन, वाराणसी, मथुरा और जयपुर में। इनमें जयपुर की वेधशाला सबसे बड़ी और सबसे बेहतरीन स्थिति में संरक्षित है, जिसे हम आज जयपुर का जंतर मंतर कहते हैं।

इस वेधशाला का निर्माण कार्य वर्ष 1728 में शुरू हुआ और 1734 में पूर्ण हुआ। इसे यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट (विश्व धरोहर स्थल) के रूप में 2010 में मान्यता मिली।

क्या है ‘जंतर मंतर’ का मतलब?
'जंतर' शब्द का अर्थ है यंत्र या उपकरण और 'मंतर' का अर्थ है गणना या माप। इस तरह ‘जंतर मंतर’ का मतलब है — गणनात्मक उपकरणों का स्थान। यहाँ मौजूद उपकरणों को देखकर आज भी यह कहना मुश्किल हो जाता है कि ये पत्थर और धातु के बने यंत्र 300 साल पहले बनाए गए थे।

 मुख्य यंत्र और उनकी खासियतें
जयपुर के जंतर मंतर में कुल 19 खगोलीय यंत्र हैं, जो विभिन्न प्रकार की खगोलीय गणनाओं और समय मापन के लिए इस्तेमाल होते हैं। इनमें कुछ प्रमुख यंत्र इस प्रकार हैं:

1. सम्राट यंत्र
यह दुनिया की सबसे बड़ी सूर्‍य घड़ी (संडायल) है। इसकी ऊँचाई लगभग 27 मीटर है और यह सिर्फ 2 सेकंड की त्रुटि के साथ समय बता सकता है। इसकी छाया के जरिए दिन के समय को सटीकता से जाना जा सकता है।

2. जयप्रकाश यंत्र
यह यंत्र खगोलीय पिंडों की स्थिति जानने के लिए प्रयोग होता है। इसमें अर्धगोलाकार गड्ढे में खगोल नक्शा दर्शाया गया है।

3. राम यंत्र
इस यंत्र की मदद से खगोलीय ऊंचाई (altitude) और दिशा (azimuth) का पता लगाया जाता है।

4. नाड़ी वलय यंत्र
यह यंत्र दिन और रात को मापने के लिए प्रयोग होता है। यह भारतीय समय और ग्रहीय स्थिति के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।इन यंत्रों की खूबी यह है कि इनमें कोई मशीन या बिजली नहीं लगती। ये पूरी तरह भौतिक और ज्यामितीय विज्ञान के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

 विज्ञान और ज्योतिष का अद्भुत संगम
जयपुर का जंतर मंतर यह दिखाता है कि कैसे भारतीय विद्वान विज्ञान, गणित और खगोलशास्त्र में विश्व के किसी भी देश से पीछे नहीं थे। जिस समय यूरोप में खगोल विद्या प्रारंभिक अवस्था में थी, भारत में इतने विशाल और सटीक यंत्रों का निर्माण हो चुका था।यह वेधशाला उस समय की वैज्ञानिक सोच, वास्तु ज्ञान और ज्योतिष की गहराई को उजागर करती है। आज भी कई खगोलशास्त्री और शोधकर्ता यहां अध्ययन के लिए आते हैं।

पर्यटन और विरासत के रूप में योगदान
हर साल लाखों पर्यटक भारत और विदेशों से जयपुर आते हैं और जंतर मंतर को देखने जरूर जाते हैं। खासकर विज्ञान से जुड़े विद्यार्थी और शोधार्थियों के लिए यह स्थान किसी जीवंत प्रयोगशाला से कम नहीं।राजस्थान पर्यटन विभाग ने इस ऐतिहासिक स्थल को संरक्षित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। ऑडियो गाइड, गाइडेड टूर और मल्टीमीडिया डिस्प्ले के माध्यम से आमजन को इसके विज्ञान को समझाने की कोशिश की जाती है।

निष्कर्ष: समय से आगे चलता है ‘जंतर मंतर’
जयपुर का जंतर मंतर सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक विरासत का प्रतीक है। जिस सूक्ष्मता और सटीकता से इन यंत्रों का निर्माण हुआ, वह आज के तकनीकी युग में भी चौंकाने वाला है। यह हमें न सिर्फ हमारे गौरवशाली अतीत से जोड़ता है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा भी देता है।आज जब हम स्मार्टवॉच और डिजिटल क्लॉक का इस्तेमाल करते हैं, तब जंतर मंतर जैसे स्मारक हमें याद दिलाते हैं कि समय को समझने की जड़ें हजारों साल पुरानी हैं, और भारत उन ज्ञान-वृक्षों में अग्रणी रहा है।अगर आप जयपुर जाएं, तो हवामहल या आमेर फोर्ट के साथ-साथ जंतर मंतर को जरूर अपनी सूची में शामिल करें, क्योंकि वहाँ विज्ञान और इतिहास दोनों एक साथ आपका स्वागत करते हैं।