जब पोकरण क्षेत्र में फैला था भैरव राक्षस का आतंक, बाबा रामदेव पीर ने किया वध, जानिए पूरी लोककथा
राजस्थान के लोकदेवता बाबा रामदेव पीर की जीवनगाथा में भैरव राक्षस के वध की कथा सबसे प्रसिद्ध लोक प्रसंगों में शामिल है। लोकमान्यता के अनुसार बाबा रामदेव जी ने अपने जीवनकाल में पोकरण क्षेत्र में आतंक फैलाने वाले भैरव नामक राक्षस का अंत किया था। इस कथा में बाबा रामदेव जी के साहस, आध्यात्मिक शक्ति और जनकल्याण की भावना का वर्णन मिलता है।
लोककथाओं के अनुसार पोकरण के आसपास के इलाके में भैरव नाम का एक भयानक राक्षस लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। उसके आतंक से स्थानीय लोग भयभीत रहते थे। कहा जाता है कि भैरव लोगों और जीव-जंतुओं को अपना शिकार बनाता था और उसके डर से आसपास के क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ था।
इसी दौरान बालक रामदेव जी का संपर्क अपने गुरु बालीनाथ जी से हुआ। लोककथा के अनुसार एक दिन खेलते-खेलते रामदेव जी बालीनाथ जी की कुटिया के पास पहुंच गए। बालीनाथ जी ने उन्हें भैरव राक्षस के बारे में बताया और वहां से चले जाने की सलाह दी। लेकिन रामदेव जी ने भय के सामने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
कथा के एक प्रचलित रूप के अनुसार भैरव राक्षस के आने पर रामदेव जी ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति और साहस का परिचय दिया। एक अन्य लोकवर्णन में कहा गया है कि भैरव ने रामदेव जी को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। अंत में रामदेव जी ने उसका सामना किया और उसका वध कर दिया। इसके बाद क्षेत्र के लोगों को भैरव के आतंक से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
भैरव राक्षस के वध की यह कहानी बाबा रामदेव जी के जीवन में इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसमें उन्हें अन्याय और आतंक के खिलाफ खड़े होने वाले लोकनायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। राजस्थान की लोक परंपराओं में बाबा रामदेव जी को केवल धार्मिक व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि समाज की रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में भी याद किया जाता है।
भैरव राक्षस की कथा आज भी राजस्थान के कई हिस्सों में लोकगीतों, कथाओं और धार्मिक आयोजनों के दौरान सुनाई जाती है। रामदेवरा आने वाले श्रद्धालुओं के बीच बाबा रामदेव जी के जीवन से जुड़े इन प्रसंगों को विशेष महत्व दिया जाता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि भैरव राक्षस के वध की कहानी मुख्य रूप से धार्मिक लोकमान्यताओं और लोककथाओं में मिलती है। इसके अलग-अलग संस्करणों में घटनाओं और स्थानों का विवरण थोड़ा अलग हो सकता है। फिर भी बाबा रामदेव जी और भैरव राक्षस की कथा राजस्थान की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
आज भी श्रद्धालु बाबा रामदेव पीर को सत्य, साहस, सेवा और जनकल्याण का प्रतीक मानते हैं। भैरव राक्षस के वध की यह लोककथा इसी विश्वास को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का काम कर रही है।