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वीडियो में देखें कैसे ''रेगिस्तान के जहाज ऊंट ने'' रेत के संमुदर में बना डाला महासागर ?

 

राजस्थान का रेगिस्तान अब सिर्फ सुनहरी रेत और ऐतिहासिक किलों तक सीमित नहीं रहा। जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क अब रोमांच प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में पार्क प्रशासन द्वारा शुरू की गई नई सफारी सेवाएं न केवल सैलानियों को रोमांचक अनुभव दे रही हैं, बल्कि क्षेत्रीय पर्यटन को भी नया जीवन दे रही हैं।

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जीप सफारी और ऊँट सफारी: रेगिस्तान का असली अनुभव

नवीनतम व्यवस्थाओं में जीप सफारी, ऊँट सफारी और स्थानीय गाइड्स की मदद से पर्यटन को और व्यवस्थित किया गया है। अब पर्यटक न केवल रेगिस्तानी जीवनशैली को करीब से देख पा रहे हैं, बल्कि डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर छिपे जैविक खजाने को भी महसूस कर पा रहे हैं।

रेत के टीलों के बीच दौड़ती जीप, सूर्यास्त के समय का सुनहरा दृश्य, और दुर्लभ वन्यजीवों की झलक – ये अनुभव हर सैलानी के दिल में एक गहरी छाप छोड़ते हैं।

वन्यजीव दर्शन का विशेष मौका

नई सफारी सेवाएं उन पर्यटकों के लिए और भी उपयोगी साबित हो रही हैं जो पक्षी और वन्यजीव प्रेमी हैं। खासकर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावन) को देखने की संभावना अब इन सफारी मार्गों पर अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा साही, चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी, और प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ सफारी के दौरान देखी जा सकती हैं।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को लाभ

सफारी सेवाओं के विस्तार से स्थानीय ग्रामीणों को भी रोजगार के अवसर मिले हैं। ऊँट संचालक, जीप चालक, लोक कलाकार और गाइड – सभी को इस पहल से आर्थिक सहयोग मिला है। इससे न केवल पर्यटन बढ़ा है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और लोक जीवन को भी पहचान मिली है।

पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान

पर्यटन बढ़ाने के साथ-साथ वन विभाग द्वारा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए भी विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। सफारी मार्गों को सीमित किया गया है ताकि वन्यजीवों का जीवन प्रभावित न हो। साथ ही, जागरूकता अभियान चलाकर सैलानियों को जैव विविधता के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है।

निष्कर्ष

जैसलमेर का डेजर्ट नेशनल पार्क अब सिर्फ एक राष्ट्रीय उद्यान नहीं, बल्कि एक अनुभव बन चुका है – जहाँ रेत, रोमांच और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। नई सफारी सेवाएं पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं, साथ ही क्षेत्रीय विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साध रही हैं। आने वाले समय में यह पहल जैसलमेर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।