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राणा कुंभा की वीरता और भारतीय वास्तुकला की भव्यता का प्रतीक है चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ, वीडियो में जानिए इससे जुड़े रोचक तथ्य

 

राजस्थान की ऐतिहासिक धरती पर बसा चित्तौड़गढ़ किला सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, परंपरा और वीरता का प्रतीक है। इसी किले के भीतर स्थित है विजय स्तंभ, जिसे "कीर्ति स्तंभ" के नाम से भी जाना जाता है। यह स्तंभ ना केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह राजपूतों की गौरवगाथा और उनके पराक्रम की अमर कहानी भी कहता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत स्मारक के 800 शब्दों में वे तथ्य, जो इसे भारत का एक अनमोल धरोहर बनाते हैं।

<a href=https://youtube.com/embed/-7xAXjbibYw?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/-7xAXjbibYw/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Vijay Stambh Chittorgarh, विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़ का इतिहास, वास्तुकला, संरचना, कब और किसने बनवाया" width="695">
1. विजय स्तंभ का निर्माण कब और क्यों हुआ?
विजय स्तंभ का निर्माण सन 1448 में मेवाड़ के प्रसिद्ध शासक राणा कुंभा ने करवाया था। यह स्तंभ उनकी विजय का प्रतीक है जो उन्होंने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी को हराकर प्राप्त की थी। यह स्तंभ एक युद्ध विजयों को समर्पित स्मारक है, जो आज भी उस वीरता की गवाही देता है।

2. वास्तुकला का अद्वितीय नमूना
यह स्तंभ 9 मंज़िलों वाला एक ऊँचा टॉवर है, जिसकी ऊँचाई लगभग 122 फीट (37.2 मीटर) है। इसे राजस्थानी और हिंदू स्थापत्य शैली में बनाया गया है। पूरे स्तंभ में अत्यंत बारीकी से की गई नक्काशी, देवी-देवताओं की मूर्तियां और पौराणिक कथाओं के दृश्य उकेरे गए हैं।

3. अंदर की सीढ़ियां और दृश्य
विजय स्तंभ के अंदर तक जाने के लिए 157 सीढ़ियों का उपयोग किया जाता है। जब कोई व्यक्ति इसके ऊपर तक चढ़ता है, तो उसे चित्तौड़गढ़ किले और आसपास के विस्तृत क्षेत्र का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। यह दृश्य न केवल मन को भाता है बल्कि इतिहास की गंभीरता भी महसूस कराता है।

4. वेदों और पुराणों की झलक
विजय स्तंभ की दीवारों पर संस्कृत में शिलालेख उकेरे गए हैं, जिनमें हिंदू धर्मग्रंथों जैसे वेद, पुराण, रामायण और महाभारत से कथाएं दर्शाई गई हैं। इन शिलालेखों को देखकर यह प्रतीत होता है कि तत्कालीन समय में धर्म और संस्कृति को कितनी गहराई से आत्मसात किया गया था।

5. स्थापत्य में प्रयोग की गई सामग्री
इस स्मारक का निर्माण रेतीले पत्थरों (सैंडस्टोन) से किया गया है। इसके पत्थरों को इस प्रकार तराशा गया है कि आज भी, सैकड़ों वर्ष बाद, वह वैसा ही चमकदार और मजबूती से खड़ा हुआ है। ये पत्थर राजस्थान की वास्तुकला में आम हैं लेकिन उनका उपयोग इतनी बारीकी और कला से यहां देखने को मिलता है।

6. धार्मिक समर्पण
हालांकि विजय स्तंभ को युद्ध में विजय की याद में बनवाया गया था, लेकिन इसकी कलात्मकता और नक्काशी इसे धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है। स्तंभ के हर मंज़िल पर शिव, विष्णु, ब्रह्मा, गणेश, देवी दुर्गा आदि की मूर्तियाँ बनी हुई हैं, जो राजपूतों की धार्मिक आस्था को दर्शाती हैं।

7. विजय स्तंभ का रात्रि सौंदर्य
हाल के वर्षों में विजय स्तंभ को रात के समय रोशनी से सजाया जाता है। विशेष अवसरों पर यह रोशनी स्तंभ को और भी आकर्षक और दिव्य बना देती है। दूर-दूर से पर्यटक इस दृश्य को देखने आते हैं और इतिहास में डूब जाते हैं।

8. युद्ध और बलिदान की यादें
चित्तौड़गढ़ और विजय स्तंभ सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि रानी पद्मिनी की जौहर कथा, राणा सांगा की वीरता और राणा कुंभा के युद्ध कौशल की साक्षी भूमि है। यह स्तंभ उन हजारों राजपूत योद्धाओं के सम्मान में भी खड़ा है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया।

9. पर्यटन का मुख्य केंद्र
विजय स्तंभ आज UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट चित्तौड़गढ़ किले का एक अहम भाग है। हर साल हजारों देशी और विदेशी पर्यटक इसे देखने आते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए यह स्थल किसी तीर्थ से कम नहीं है।

10. भारतीय पहचान का प्रतीक
विजय स्तंभ सिर्फ चित्तौड़गढ़ की शान नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और अस्मिता का प्रतीक है। यह दिखाता है कि भारत ने कैसे कठिन परिस्थितियों में भी अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा की।

चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ न केवल स्थापत्य का चमत्कार है, बल्कि यह एक जीवंत प्रतीक है भारत की वीरता, आस्था और संस्कृति का। इसकी ऊँचाई सिर्फ एक इमारत की नहीं, बल्कि उस आत्मबल की है जो सदियों तक विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध डटा रहा। यदि आपने अभी तक इस स्थल की यात्रा नहीं की है, तो इसे अपनी सूची में जरूर जोड़ें, क्योंकि यह स्थल इतिहास से संवाद करता है और आत्मा को प्रेरणा देता है।अगर आप भी भारत के ऐसे अद्भुत ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़ी गाथाओं में रुचि रखते हैं, तो चित्तौड़गढ़ का विजय स्तंभ आपकी अगली ऐतिहासिक यात्रा का प्रमुख पड़ाव होना चाहिए।