राजस्थान की शहरी आबादी के बीच बसा लेपर्डस का अनोखा संसार, वीडियो में इस अद्भुत दुनिया की सैर कर फौरन बना लेंगे घूमने का मन
Updated: Apr 21, 2025, 11:36 IST
राजस्थान एक ऐसा नाम है जो दुनिया में शायद ही किसी ने सुना हो। एक तरफ यह रेगिस्तान अपने किलों, महलों और पर्यटन स्थलों के लिए मशहूर है, वहीं दूसरी तरफ यहां का वन्यजीवन भी पूरी दुनिया में काफी मशहूर है। राजस्थान में कई ऐसे राष्ट्रीय उद्यान, रिजर्व और सफारी हैं जिन्होंने खुद को और राजस्थान के नाम को पूरी दुनिया में प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के बीच अमर कर दिया है।
राजाओं की धरती के नाम से मशहूर राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान अपने बाघों के लिए जाने जाते हैं, वहीं यहां कुछ ऐसे अभ्यारण्य और सफारी भी हैं जो तेंदुओं का घर हैं, तो आज हम जयपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध झालाना लेपर्ड सफारी भी जाएंगे।झालाना लेपर्ड रिजर्व की प्रसिद्धि का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत की बड़ी-बड़ी हस्तियां अक्सर झालाना लेपर्ड अभ्यारण्य में तेंदुओं को देखते हुए नजर आती हैं। भारत रत्न क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर अपनी पत्नी अंजलि तेंदुलकर और परिवार के साथ कई बार झालाना में तेंदुओं को कैमरे में कैद करते नजर आ चुके हैं।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाजी कप्तान और मुख्य कोच राहुल द्रविड़ भी सचिन तेंदुलकर की सलाह पर तेंदुआ सफारी के लिए झालाना पहुंचे। अभिनेता रितेश देशमुख भी अपनी पत्नी जेनेलिया और बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने जयपुर आए और झालाना तेंदुआ सफारी में प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठाया। बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त और रवीना टंडन फिल्म घुड़चढ़ी की शूटिंग के दौरान झालाना तेंदुआ सफारी पार्क में करीब 3 घंटे तक इस जगह की शान पैंथर बहादुर को देखकर रोमांचित हुए। मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल भी अपने पति और परिवार के साथ फैमिली टूर के दौरान तेंदुओं को देखने झालाना आईं।
बॉलीवुड के सबसे बड़े वन्यजीव प्रेमी रणदीप हुड्डा राजस्थान की हर यात्रा के दौरान तेंदुआ सफारी में पैंथरों को देखते नजर आए हैं। इनके अलावा झालाना तेंदुआ रिजर्व कई अन्य बॉलीवुड, साउथ सिनेमा और टीवी हस्तियों की पसंदीदा जगह है, जिनमें मयूर मेहता, बलराज, आकांक्षा सिंह, सृष्टि रोहन और राजीव खंडेलवाल शामिल हैं। झालाना लेपर्ड सफारी भारत का पहला तेंदुआ रिजर्व है, जो जयपुर शहर के बीचों-बीच घनी आबादी के बीच स्थित है। यह भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला अरावली पहाड़ियों से घिरा हुआ है। 23 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस पार्क को वर्ष 2017 में तेंदुआ रिजर्व बनाया गया था।
झालाना लेपर्ड सफारी रणथंभौर और सरिस्का नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व से अलग जंगल में बसे होने की बजाय शहर की घनी आबादी के बीच में स्थित है, जिसके कारण इसे पूरी दुनिया में एक अनोखे तेंदुआ पार्क का दर्जा मिला हुआ है।
अगर आप रणथंभौर नेशनल पार्क और सरिस्का टाइगर रिजर्व के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो आपको डिस्क्रिप्शन में इनके वीडियो का लिंक मिल जाएगा। झालाना लेपर्ड सफारी जयपुर के मध्य स्थित झालाना के जंगलों में बना एक तेंदुआ संरक्षण पार्क है, जहां वर्ष 2018 में पर्यटकों के लिए सफारी शुरू की गई थी। अरावली पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित झालाना सफारी पार्क अपने आप में एक आदिम जंगल है, जो इसे गलता घाटी के जंगलों और रामगढ़ बांध के जंगलों के माध्यम से सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान से जोड़ता है। जयपुर शहर के सबसे विकसित क्षेत्रों में से एक मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित झालाना पार्क जयपुर हवाई अड्डे और गांधी नगर रेलवे स्टेशन से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जयपुर के झालाना क्षेत्र में स्थित इस वन क्षेत्र का उपयोग जयपुर राजपरिवार द्वारा अठारह सौ साठ तक निजी संपत्ति के रूप में शिकार के लिए किया जाता था।
झालाना लेपर्ड रिजर्व का सबसे बड़ा आकर्षण शिकार होदी फिलहाल झालाना लेपर्ड सफारी में 40 से ज्यादा तेंदुए और 5 शावक रहते हैं. इस लेपर्ड सफारी को झालाना लेपर्ड कॉलोनी भी कहा जाता है, क्योंकि जैसे कॉलोनी में रहने के लिए अलग-अलग घर होते हैं, वैसे ही इस सफारी में अलग-अलग तेंदुए अपनी-अपनी टेरेटरी बनाकर यहां रहते हैं. झालाना के जंगल में स्थित झालाना लेपर्ड सफारी के तेंदुए अपने अनोखे नामों के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें देखने वाले व्यक्ति के नाम पर रखे जाते हैं. यहां रहने वाले सभी तेंदुओं के नामों के पीछे कोई न कोई खास वजह जरूर छिपी है. जैसे, यहां की एक मादा तेंदुए का नाम आरती रखा गया है, क्योंकि वह रोजाना आरती के समय मंदिर के आसपास नजर आती है. इसी तरह, यहां के एक तेंदुए का नाम राणा रखा गया है, क्योंकि वह ज्यादा आक्रामक और रौबदार होता है।
इसके अलावा झालाना जंगल के खनन क्षेत्र में रहने वाली मादा तेंदुए का नाम मिसेज खान रखा गया है। इसी तरह यहां के एक तेंदुए को रणथंभौर की सबसे बड़ी टाइगर फिश की तरह सबसे ज्यादा शावकों को जन्म देने के कारण फ्लोरा मछली नाम दिया गया है। यहां के एक तेंदुए की नाक पर नोज रिंग जैसा निशान होता है, इसलिए इसका नाम नाथवाली रखा गया। झालाना के जंगलों में नर और मादा तेंदुए का जोड़ा हमेशा साथ रहता है, जिस कारण इनका नाम रोमियो जूलियट रखा गया है। इन सबके अलावा वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच अपनी बहादुरी के लिए मशहूर एक तेंदुए का नाम बहादुर रखा गया है।
तेंदुओं के अलावा आप यहां धारीदार लकड़बग्घा, भारतीय सिवेट, रेगिस्तानी बिल्लियां, जंगली बिल्लियां, रेगिस्तानी लोमड़ी, सियार, साही, जंगली चूहे, मॉनिटर छिपकली, नेवले, सांभर हिरण, चीतल, नीलगाय और सांपों की कई प्रजातियां देख सकते हैं। इसके साथ ही पार्क में कई पक्षी प्रजातियां मौजूद हैं, जो इसे पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बनाती हैं। झालाना वन एक शुष्क पर्णपाती वन है, जो अरावली पहाड़ियों की ढलानदार घाटियों और तीखी चट्टानों जैसा दिखता है। जंगल में जूलीफ्लोरा और खेजड़ी जैसे पौधे पाए जाते हैं, जो शुष्क परिस्थितियों में उगते हैं। इसके अलावा, यहाँ कई अन्य स्थानीय पौधे पाए जाते हैं, जिनमें ढाक, सालार, ढोंक और कुमटा शामिल हैं। इस क्षेत्र की जैव विविधता भी इसे तेंदुओं के लिए उपयुक्त घर बनाने में योगदान देती है।
झालाना तेंदुआ रिजर्व पूरे साल खुला रहता है, भारत के कई अन्य वन्यजीव अभयारण्यों के विपरीत, झालाना मानसून के मौसम में भी खुला रहता है। हालाँकि, नवंबर से अप्रैल यहाँ घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। झालाना सफारी पार्क गर्मियों में सुबह 5:45 से 8:15 बजे और शाम 4:45 से 7:15 बजे तक और सर्दियों में सुबह 6:15 से 8:45 बजे और दोपहर 3:30 से 6:15 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। झालाना में सफारी के लिए आपको पार्क के मुख्य द्वार से ही जिप्सी मिल जाएगी, जिसमें अधिकतम 6 लोग बैठकर सफारी का आनंद ले सकते हैं। जिप्सी के लिए आपको लगभग 4500 रुपए का शुल्क देना होगा।
झालाना लेपर्ड रिजर्व जयपुर शहर के मध्य में स्थित है, यहां घूमने के लिए आप हवाई, ट्रेन या सड़क मार्ग से यात्रा करके झालाना सफारी पार्क पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से यहां पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा सांगानेर हवाई अड्डा 5 किमी की दूरी पर स्थित है। ट्रेन से यहां पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जयपुर जंक्शन 10 किमी की दूरी पर स्थित है। जयपुर शहर देश के सभी मुख्य राजमार्गों से जुड़ा हुआ है, जिस वजह से आप यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। झालाना लेपर्ड सफारी के दौरान आप जयपुर के कुछ सबसे मशहूर होटलों की शाही मेहमाननवाजी का भी लुत्फ उठा सकते हैं, इसके लिए आप रामबाग पैलेस, मैरियट होटल, फोर्ट चंद्रगुप्त, राजस्थान पैलेस, अलसीसर हवेली, ओबेरॉय राज विलास, आईटीसी राजपुताना, जयमहल पैलेस, होटल शिव विलास पैलेस और होटल मानसिंह में ठहरने का प्लान बना सकते हैं।
जयपुर झालाना लेपर्ड सफारी के आसपास देखने लायक कई दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें मुख्य रूप से जल महल, आमेर किला, नाहरगढ़ किला, जयगढ़ किला, सिटी पैलेस, सिसोदिया रानी का बाग, गलता जी मंदिर, मोतीडूंगरी, हवा महल, अल्बर्ट हॉल म्यूजियम और जंतर मंतर शामिल हैं। अगर आप झालाना लेपर्ड सफारी के साथ-साथ इन जगहों पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपको यहां डिस्क्रिप्शन में घूमने की पूरी जानकारी के वीडियो का लिंक मिल जाएगा। तो दोस्तों यह थी भारत की पहली तेंदुआ सफारी झालाना, वीडियो देखने के लिए धन्यवाद, अगर आपको यह वीडियो पसंद आया तो कृपया कमेंट करके अपनी राय दें, चैनल को सब्सक्राइब करें, वीडियो को लाइक करें और अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें।