भारत की सबसे बड़ी नहर की कहानी: कैसे ‘गंगानहर’ बनी ‘इंदिरा गांधी नहर’, बदली राजस्थान की तस्वीर
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में जहां कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहां आज खेतों में हरियाली दिखाई देती है। इस बदलाव के पीछे भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल इंदिरा गांधी नहर परियोजना का सबसे बड़ा योगदान है। कभी इसे राजस्थान नहर और उससे पहले गंगानहर के नाम से जाना जाता था। यह नहर केवल पानी पहुंचाने का माध्यम नहीं बनी, बल्कि इसने पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था, कृषि और जनजीवन को पूरी तरह बदल दिया।
गंगानहर से शुरू हुई कहानी
इस विशाल नहर परियोजना की नींव गंगानहर से जुड़ी हुई है। गंगानहर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह के प्रयासों से हुआ था। उस समय बीकानेर राज्य का बड़ा हिस्सा रेगिस्तानी था और पानी की भारी कमी थी। किसानों और पशुपालकों को जीवन यापन के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।
महाराजा गंगा सिंह ने सतलुज नदी के पानी को राजस्थान के सूखे क्षेत्रों तक पहुंचाने का सपना देखा। लंबे प्रयासों के बाद वर्ष 1927 में गंगानहर परियोजना पूरी हुई। इस नहर ने श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि की नई शुरुआत की। रेगिस्तान में पहली बार बड़े पैमाने पर खेती संभव हुई और यह इलाका धीरे-धीरे समृद्ध होने लगा।
राजस्थान नहर परियोजना का जन्म
आजादी के बाद सरकार ने पश्चिमी राजस्थान के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र में पानी पहुंचाने के लिए एक और बड़ी योजना बनाई। वर्ष 1958 में राजस्थान नहर परियोजना की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य पंजाब की नदियों के पानी को राजस्थान के सूखे इलाकों तक पहुंचाना था।
इस परियोजना के तहत सतलुज और ब्यास नदियों के पानी को हरिके बैराज से निकालकर राजस्थान के जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई।
इंदिरा गांधी नहर नाम कैसे पड़ा?
वर्ष 1984 में राजस्थान नहर परियोजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में इस विशाल परियोजना का नाम रखा गया।
यह नहर प्रणाली आज भारत की सबसे लंबी और सबसे बड़ी सिंचाई नहर प्रणालियों में से एक है। इसकी मुख्य नहर की लंबाई करीब 650 किलोमीटर है, जबकि इसकी वितरिकाओं सहित पूरा नेटवर्क हजारों किलोमीटर तक फैला हुआ है।
रेगिस्तान में आई हरित क्रांति
इंदिरा गांधी नहर के आने से पश्चिमी राजस्थान में बड़ा सामाजिक और आर्थिक बदलाव आया। जहां पहले केवल बाजरा, ग्वार जैसी कम पानी वाली फसलें होती थीं, वहां अब गेहूं, कपास, सरसों और अन्य फसलों की खेती होने लगी।
श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे जिले राजस्थान के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल हो गए। कई नए गांव बसे और लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले।
चुनौतियां भी कम नहीं
इतनी बड़ी परियोजना के साथ कई चुनौतियां भी सामने आईं। कुछ क्षेत्रों में जलभराव और मिट्टी में लवणता की समस्या बढ़ी। इसके अलावा पानी के सही प्रबंधन और वितरण को लेकर भी कई बार विवाद सामने आते रहे।
सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम, जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया।
राजस्थान की जीवनरेखा बनी नहर
इंदिरा गांधी नहर केवल एक जल परियोजना नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के विकास की कहानी है। इसने थार के रेगिस्तान में उम्मीद की नई धारा बहाई। जहां कभी दूर-दूर तक रेत के टीले नजर आते थे, वहां आज खेत लहलहा रहे हैं।
गंगानहर से शुरू हुआ यह सफर इंदिरा गांधी नहर तक पहुंचकर राजस्थान के इतिहास की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी योजनाओं में शामिल हो चुका है। यह नहर आज भी लाखों लोगों की जिंदगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बनी हुई है।