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जयगढ़ किले में बनवाए गए इन रहस्यमयी कमरों से आज भी आती है दर्दनाक चीखों की आवाज, वीडियो में जाने रहस्यमई गाथा 

 

राजस्थान की राजधानी जयपुर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित जयगढ़ किला केवल अपनी सैन्य शक्ति, विशाल तोप ‘जयवन’, और शानदार स्थापत्य के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यह किला कई रहस्यों और अनकही कहानियों का भी गवाह रहा है। इन्हीं कहानियों में से एक है – रानियों के लिए बनाए गए वो रहस्यमयी और खौफनाक कमरे, जिनकी गूंज आज भी जयगढ़ के दीवारों से सुनाई देती है।

<a href=https://youtube.com/embed/TqcRw_2SJQk?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/TqcRw_2SJQk/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Jaigarh Fort Jaipur History | जयगढ़ किले का इतिहास, स्थापना, वास्तुकला, खजाना, विश्व की सबसे बड़ी तोप" width="695">
जयगढ़ किला: एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जयगढ़ किला 18वीं शताब्दी में आमेर और जयपुर रियासत की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। इसे सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था और इसका उद्देश्य शत्रु आक्रमणों से किले और राजधानी की रक्षा करना था। 400 मीटर ऊँचाई पर अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह किला अपने अंदर कई सुरंगों, तहखानों, शस्त्रागार और गोपनीय कमरों को समेटे हुए है।लेकिन इन्हीं कमरों में एक हिस्सा ऐसा भी है, जो विशेष रूप से रानियों के लिए बनाया गया था, और इसके साथ जुड़ी किंवदंतियाँ इसे रहस्य और डर का केंद्र बना देती हैं।

रानियों के रहस्यमयी कक्ष: शाही वैभव या कैद?
इन कमरों को "महिलाओं की चौकी" या "रानियों की कोठरी" कहा जाता है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, इन्हें रानियों की सुरक्षा और निजता के लिए बनवाया गया था, ताकि युद्ध या बाहरी संकट की स्थिति में उन्हें महफूज़ रखा जा सके। लेकिन स्थानीय कहानियों और किले से जुड़े किस्सों में यह स्थान एकदम अलग रूप में सामने आता है।इन कमरों में रोशनी की बेहद कम व्यवस्था थी, संकरी खिड़कियाँ, गूंजते गलियारे, और मोटी दीवारें – यह सब मिलकर एक भयावह वातावरण तैयार करते हैं। कई लोगों का मानना है कि इन कमरों को रानियों को बंदी बनाकर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, खासतौर पर तब जब वे दरबार या राजा के आदेशों का पालन नहीं करती थीं।

खौफ की कहानियाँ और लोककथाएं
बंद दरवाज़े और चीखों की गूंज

स्थानीय गाइड्स बताते हैं कि किले के कुछ हिस्सों में मौजूद कमरों से रात को अजीब सी आवाजें आती हैं – जैसे कोई चीख रहा हो या कराह रहा हो। कहा जाता है कि ये आवाजें उन रानियों की आत्माओं की हैं जो कभी इन कमरों में कैद होकर रह गई थीं।

एक रानी की आत्मा की कहानी
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक रानी जो राजा के विरोध में खड़ी हुई थी, उसे इन्हीं कमरों में ज़िंदा दफना दिया गया। आज भी उसके कमरे को बंद रखा गया है और वहां किसी को जाने की अनुमति नहीं दी जाती।

सुरंगों में गुम हुआ सच
जयगढ़ किले में मौजूद सुरंगों का जाल इन कमरों से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि कुछ सुरंगों से भागने की कोशिश करने वाली रानियों को पकड़कर फिर से इन कमरों में बंद कर दिया जाता था – या हमेशा के लिए गायब कर दिया जाता था।

क्या है इन कमरों का वास्तविक उद्देश्य?
इतिहासकारों के बीच इस विषय पर बहस जारी है। कुछ का मानना है कि यह महल के महिला वर्ग (जनाना) के हिस्से थे, जहां रानियों को पूर्ण गोपनीयता और शाही आराम उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि इन कमरों का राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था — एक तरह से मानसिक और सामाजिक कैद।इन कमरों की बनावट सामान्य कक्षों से बहुत अलग है — न तो इसमें पर्याप्त वेंटिलेशन है और न ही सूरज की रोशनी का रास्ता। इससे यह संदेह और मजबूत होता है कि शायद इनका इस्तेमाल सजा देने के लिए भी किया जाता रहा हो।

क्या आज भी इन कमरों में कुछ है?
जयगढ़ किले का प्रशासन इन कमरों तक आम पर्यटकों की पहुंच को सीमित रखता है। सिर्फ कुछ गाइडेड टूर ही हैं जो इन हिस्सों तक पहुंचते हैं, वो भी सीमित समय के लिए और सुरक्षा के बीच। यहां की दीवारों पर खरोंच, पुराने समय के चित्र और कुछ अर्ध-ध्वस्त फर्नीचर आज भी उस रहस्य को जीवित रखते हैं।

निष्कर्ष: खौफ और इतिहास का संगम
जयगढ़ किले में रानियों के लिए बने ये रहस्यमयी और खौफनाक कमरे आज भी इतिहास के सबसे कम बोले गए अध्याय हैं। क्या ये कमरे वाकई सिर्फ सुरक्षा के लिए बनाए गए थे? या फिर ये शाही सत्ता के भीतर छुपे मानसिक उत्पीड़न के गवाह हैं?इन सवालों का जवाब पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जो भी है – वह इस बात का प्रमाण है कि हर चमकते किले की दीवारों के पीछे कई परछाइयां होती हैं। जयगढ़ का ये हिस्सा आज भी इतिहास के शोधकर्ताओं, रोमांच प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक रहस्यमयी आकर्षण बना हुआ है।