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राजस्थान का 300 साल पुराना रहस्यमयी कुंड, सर्दियों में गर्म और गर्मियों में बर्फ जैसा ठंडा रहता है पानी

 

राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, किलों और अनोखी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन प्रदेश में कई ऐसे प्राकृतिक और धार्मिक स्थल भी हैं, जो आज भी लोगों के लिए रहस्य बने हुए हैं। ऐसा ही एक अनोखा कुंड हाड़ौती क्षेत्र में चंबल नदी के किनारे स्थित है, जहां पानी का तापमान मौसम के बिल्कुल विपरीत रहता है। करीब 200 से 300 साल पुराने इस कुंड को लेकर लोगों में गहरी आस्था और जिज्ञासा है।

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इस रहस्यमयी कुंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सर्दियों के मौसम में जब राजस्थान में कड़ाके की ठंड पड़ती है, तब भी यहां का पानी गर्म महसूस होता है। वहीं गर्मियों में जब तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है, तब यही पानी बेहद ठंडा और बर्फ जैसा महसूस होता है। पानी के इस अनोखे व्यवहार ने इसे आसपास के लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह प्राकृतिक कुंड विशाल चट्टानों को काटकर बनाया गया था। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इसमें लगातार पानी आता रहता है, लेकिन इसका वास्तविक स्रोत आज तक पता नहीं चल पाया है। जमीन के अंदर से निकलने वाली इस जलधारा को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं, लेकिन वैज्ञानिक स्तर पर इसके स्रोत को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

कुंड से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं भी काफी प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पानी में औषधीय गुण मौजूद हैं। कई लोग त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे दाद, खाज और खुजली से राहत पाने के लिए यहां स्नान करने पहुंचते हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दूर से श्रद्धालु इस स्थान पर आते हैं और कुंड के पानी को अपने साथ भी ले जाते हैं।

मंदिर से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों में भी इस कुंड के पानी का विशेष महत्व है। यहां भगवान के अभिषेक और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए इसी जल का उपयोग किया जाता है। कुंड से निकलने वाली जलधारा आगे चलकर गोमुखी के माध्यम से चंबल नदी में मिल जाती है। श्रद्धालु इस जलधारा के नीचे स्नान करना भी शुभ मानते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कुंड कभी सूखा नहीं है। कई पीढ़ियों से लोग इसकी सेवा और देखरेख करते आ रहे हैं। पहले के समय में जब इलाके में आधुनिक जल सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब धार्मिक आयोजनों और अन्य जरूरतों के लिए इसी कुंड के पानी का उपयोग किया जाता था।

इस कुंड की स्वच्छता भी लोगों को आकर्षित करती है। स्थानीय श्रद्धालु नियमित रूप से इसकी सफाई करते हैं। लगातार बहते पानी के कारण यहां गंदगी जमा नहीं होती और जलधारा साफ बनी रहती है।

चंबल नदी के किनारे स्थित यह अनोखा कुंड राजस्थान की प्राकृतिक और धार्मिक विरासत का एक उदाहरण है। जहां एक ओर इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है, वहीं दूसरी ओर मौसम के विपरीत पानी का तापमान आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। यही वजह है कि यह स्थान हाड़ौती क्षेत्र की अनोखी पहचान बन चुका है।