नेपाल का वो खूबसूरत इलाका जो बाढ़ में डूबा, जानिए क्यों वहाँ पहुँचते हैं हज़ारों विदेशी पर्यटक?
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान हिमालयी क्षेत्र की ओर खींच दिया है। नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी आए हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें भारत सहित 30 से ज्यादा देशों के नागरिक होने की आशंका है। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते ही क्यों हैं?
हिमालय और एवरेस्ट का आकर्षण
नेपाल दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का घर है और यही उसकी सबसे बड़ी पर्यटन ताकत है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के अलावा लांगटांग, अन्नपूर्णा, मनास्लू जैसे पर्वतीय क्षेत्र हर साल हजारों ट्रेकर्स और एडवेंचर पसंद करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
नेपाल में पर्यटन अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में 11.47 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक नेपाल पहुंचे थे।
बाढ़ से प्रभावित रसुवा जिला भी पर्यटन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। स्याफ्रुबेसी और तिमुरे जैसे इलाके लांगटांग वैली और तमांग हेरिटेज ट्रेल की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों में शामिल हैं। इसके अलावा तिब्बत की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण मार्ग है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा भी बड़ी वजह
नेपाल के इन इलाकों में विदेशी यात्रियों की मौजूदगी का एक बड़ा कारण धार्मिक पर्यटन भी है। हर साल भारत समेत कई देशों से तीर्थयात्री कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचते हैं।
नेपाल-चीन सीमा के नजदीक मौजूद रास्ते इस यात्रा के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माने जाते हैं। यही वजह है कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में केवल ट्रेकर्स और एडवेंचर टूरिस्ट ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में तीर्थयात्री भी मौजूद हो सकते हैं।
नेपाल का आकर्षण सिर्फ एवरेस्ट तक नहीं
विदेशी पर्यटकों के लिए नेपाल की पहचान केवल एवरेस्ट तक सीमित नहीं है। यहां ऊंचे बर्फीले पहाड़ों के साथ खूबसूरत झीलें, बौद्ध मठ, हिंदू मंदिर, जंगल और हिमालयी गांव भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
कई विदेशी पर्यटक शहरों और प्रमुख पर्यटन केंद्रों से दूर जाकर गांवों में होमस्टे करते हैं और स्थानीय संस्कृति तथा जीवनशैली को करीब से समझना पसंद करते हैं। रसुवा क्षेत्र में स्थित गोसाइंकुंड जैसे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल भी यात्रियों के आकर्षण का केंद्र हैं।
इसलिए सामान्य परिस्थितियों में रसुवा और नेपाल-चीन सीमा से जुड़े ये पहाड़ी इलाके पर्यटकों के लिए बिल्कुल अनजान या असामान्य जगह नहीं हैं। ये नेपाल के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक मार्गों का हिस्सा हैं। हालांकि, इस बार अचानक आई बाढ़ ने इन्हीं पर्यटन गलियारों को बेहद खतरनाक बना दिया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ विदेशी यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई।