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रणथंभौर का वन्य जीवन!वीडियो में जानिए क्यों युवाओं के लिए टाइगर्स का यह गढ़ बनता जा रहा है नेचर टूरिज्म की पहली पसंद

 

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व न केवल भारत के प्रमुख टाइगर रिजर्व्स में से एक है, बल्कि बाघों की नई पीढ़ी के लिए भी एक सुरक्षित और उपजाऊ स्थल बन चुका है। यह वह जगह है जहाँ बाघों की गर्जना और जंगल की खामोशी साथ-साथ चलती हैं। यही कारण है कि इस अभयारण्य को अब “बाघों का यंगिस्तान” कहा जाने लगा है — क्योंकि यहाँ युवा टाइगर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।

<a href=https://youtube.com/embed/_IF31yVaHwM?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/_IF31yVaHwM/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Ranthambore Tiger Reserve, रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का इतिहास, जोन, सफारी फीस, टाइगर्स और ट्रिप बजट" width="695">
इतिहास और विरासत
रणथंभौर का इतिहास 10वीं शताब्दी तक जाता है। कभी यह क्षेत्र जयपुर के महाराजाओं का शिकार स्थल हुआ करता था। 1955 में इसे सवाई माधोपुर गेम सैंक्चुअरी घोषित किया गया और 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया। 1980 में यह आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान बन गया और बाद में इसके आसपास के जंगलों को मिलाकर रणथंभौर टाइगर रिजर्व का रूप दिया गया।

युवा बाघों का गढ़
आज रणथंभौर टाइगर रिजर्व न केवल पुराने और प्रसिद्ध बाघों जैसे मछली (T-16) की धरती है, बल्कि युवा पीढ़ी के बाघों जैसे Arrowhead (T-84), Riddhi, Siddhi, Veer और Akbar जैसे नाम तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन बाघों का व्यवहार, इलाके की पकड़ और बढ़ती संख्या इस रिजर्व को एक सक्रिय टाइगर ब्रीडिंग ज़ोन में बदल रहे हैं।

टाइगर जोन और सफारी अनुभव
रणथंभौर टाइगर रिजर्व को विभिन्न जोनों (Zone 1 से Zone 10) में बांटा गया है, जिनमें से प्रत्येक का अपना अलग परिदृश्य, जल स्रोत और बाघों का दबदबा है।
Zone 2, 3 और 4 को अक्सर सबसे ज्यादा बाघ दर्शन के लिए जाना जाता है।
Zone 6 से 10 में हाल के वर्षों में बाघों की गतिविधियां बढ़ी हैं और ये अपेक्षाकृत कम भीड़ वाले ज़ोन हैं।
जिप्सी और कैंटर के माध्यम से जंगल सफारी की सुविधा मिलती है, जिसमें प्रशिक्षित गाइड और ट्रैकर आपके साथ होते हैं।

सफारी की फीस और समय
सफारी दो शिफ्ट में होती है —
सुबह: 6:30 से 10:00 बजे तक
शाम: 2:30 से 6:00 बजे तक
भारतीय नागरिकों के लिए टिकट की कीमत लगभग ₹1000-₹1500 प्रति व्यक्ति (जिप्सी) होती है जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए यह राशि अधिक होती है। ऑनलाइन बुकिंग सुविधा राजस्थान फॉरेस्ट विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

प्राकृतिक विविधता का खज़ाना
बाघों के अलावा यह रिजर्व अन्य जीव-जंतुओं का भी घर है। यहाँ चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू, लकड़बग्घा और तेंदुए देखे जा सकते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह स्थान स्वर्ग है — Indian Eagle Owl, Crested Serpent Eagle और Kingfishers यहाँ आसानी से देखे जा सकते हैं।

रणथंभौर किला: विरासत और वास्तु
रणथंभौर किले को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। यह किला रिजर्व के मध्य स्थित है और यहाँ से पूरे जंगल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। किले में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण है।

यात्रा का आदर्श समय और ट्रिप बजट
अक्टूबर से जून तक का समय रणथंभौर घूमने के लिए उपयुक्त होता है, खासकर मार्च से मई तक बाघों की गतिविधियां अधिक देखी जाती हैं।

एक औसत ट्रिप बजट:
3 दिन/2 रातों की यात्रा के लिए:
होटल (मिड रेंज): ₹3000–₹5000 प्रतिदिन
सफारी (2 टाइम): ₹2500–₹4000
कुल अनुमानित खर्च: ₹10,000–₹15,000 प्रति व्यक्ति

विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण
रणथंभौर अब वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना चुका है। दुनियाभर से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और नेचर लवर्स यहाँ खिंचे चले आते हैं। यहाँ की जैव विविधता, खुले मैदान, पहाड़ियां और पानी के स्रोत विदेशी यात्रियों के लिए अफ्रीका की सफारी जैसी ही अनुभूति देते हैं।

पर्यटन से संरक्षण तक
रणथंभौर में बढ़ता पर्यटन जहां स्थानीय रोजगार के अवसर देता है, वहीं वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण की चुनौती भी बढ़ जाती है। राजस्थान सरकार और वन विभाग मिलकर टाइगर की संख्या और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए तकनीकी निगरानी, कैमरा ट्रैप्स, और गश्ती दलों की तैनाती कर रहे हैं।