×

सिर्फ आध्यात्म नहीं पर्यटन की दृष्टि से भी अहम है रणकपुर जैन टेम्पल, वीडियो में जाने यहां क्यों सात समंदर पार से खिंचे चले आते है लोग  

 

राजस्थान की वीर भूमि केवल किलों और राजाओं की गाथाओं के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां की धार्मिक धरोहरें भी विश्वस्तर पर अपनी अद्भुत वास्तुकला और आध्यात्मिकता के लिए पहचानी जाती हैं। ऐसी ही एक अद्वितीय धरोहर है – रणकपुर जैन मंदिर, जो अपने स्तंभों की बेमिसाल नक्काशी, शांत वातावरण और आसपास के प्राकृतिक सौंदर्य के कारण लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

<a href=https://youtube.com/embed/YMVP1lbMWGM?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/YMVP1lbMWGM/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Ranakpur Jain Temple | रणकपुर जैन मंदिर का इतिहास, वास्तुकला, मान्यता, दर्शन, कब और किसने बनवाया" width="695">
रणकपुर मंदिर: कहां स्थित है और कैसे पहुंचे?
रणकपुर जैन मंदिर राजस्थान के पाली जिले के देसूरी तहसील में स्थित है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा एक शांत और हरा-भरा इलाका है। यह मंदिर उदयपुर से लगभग 90 किलोमीटर, माउंट आबू से 160 किलोमीटर और जोधपुर से 160 किलोमीटर की दूरी पर है।

यहां तक पहुँचने के लिए आप:
सड़क मार्ग से निजी टैक्सी या बस ले सकते हैं,
निकटतम रेलवे स्टेशन: फालना (35 किमी),
निकटतम हवाई अड्डा: महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, उदयपुर।
आकर्षण का मुख्य केंद्र: 1444 नक्काशीदार स्तंभों वाला अद्भुत ढांचा
रणकपुर जैन मंदिर को मुख्यतः भगवान आदिनाथ (पहले तीर्थंकर) को समर्पित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है – 1444 नक्काशीदार संगमरमर के स्तंभ, और आश्चर्य की बात यह है कि हर स्तंभ का डिज़ाइन एक-दूसरे से अलग है।

इन स्तंभों पर की गई कारीगरी में फूलों की पंखुड़ियाँ, घंटियां, नर्तकियों की आकृतियाँ और भगवान की मूर्तियाँ बनाई गई हैं।मंदिर का गर्भगृह, ऊंची शिखरें और चारों दिशाओं में बने द्वार इसे एक भव्य चतुर्मुखी संरचना बनाते हैं।छतों पर बनी जटिल नक्काशियां और छायाएं दिन के अलग-अलग समय में नई अनुभूति देती हैं।

मंदिर के भीतर की संरचना और आध्यात्मिक वातावरण
मंदिर का पूरा परिसर करीब 48,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है। मुख्य गर्भगृह में भगवान आदिनाथ की एक भव्य संगमरमर की प्रतिमा है। इसके चारों ओर छोटे-छोटे 24 मंडप बने हुए हैं, जो जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित हैं।यहाँ आने वाला हर आगंतुक इसकी शांति, स्वच्छता और दिव्यता से अभिभूत हो जाता है। मंदिर में प्रवेश के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए पर्यटक एक शांतिपूर्ण अनुभव ले सकते हैं।

रणकपुर के आसपास के दर्शनीय स्थल
रणकपुर जैन मंदिर के अलावा, इसके आसपास भी कुछ बेहतरीन दर्शनीय स्थल हैं जो आपकी यात्रा को और समृद्ध बना सकते हैं:

1. सुंदर अरावली घाटियां और जंगल सफारी
रणकपुर क्षेत्र अरावली की हरियाली से घिरा हुआ है। जंगलों में वाइल्डलाइफ और बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए यह जगह बेहद शानदार है।

2. कुंभलगढ़ किला (50 किमी दूर)
यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स में शामिल यह किला मेवाड़ की वीरता की मिसाल है। इसकी दीवारें चीन की ग्रेट वॉल के बाद दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती हैं।

3. सुनसान घाटी और लोढ़ा जंग
यह क्षेत्र ट्रैकिंग, नेचर फोटोग्राफी और शांतिपूर्ण वॉक के लिए उत्तम है।

4. सूर्य मंदिर (रणकपुर)
रणकपुर मंदिर परिसर से थोड़ी दूरी पर स्थित यह छोटा लेकिन खूबसूरत सूर्य मंदिर भी देखने लायक है।

पर्यटकों के लिए टिप्स
मंदिर में चप्पल, चमड़े के सामान और कैमरा अंदर ले जाना प्रतिबंधित है।
मंदिर में प्रवेश का समय सुबह 12 बजे से शाम 5 बजे तक है (श्रद्धालुओं के लिए अलग समय रहता है)।
ड्रेस कोड: कंधे और घुटने ढकने वाले वस्त्र पहनना जरूरी है।
आसपास कुछ अच्छे रिसॉर्ट और गेस्टहाउस हैं जहाँ आप प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हुए रात्रि विश्राम कर सकते हैं।

निष्कर्ष: वास्तुकला और भक्ति का अद्भुत संगम
रणकपुर जैन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्टता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। इसकी खूबसूरती, शांति और नक्काशी पर्यटकों को एक गहरे अनुभव से भर देती है।जो लोग आध्यात्मिक यात्रा, आर्ट और आर्किटेक्चर या नेचर से जुड़े अनुभवों की तलाश में हैं, उनके लिए रणकपुर एक आदर्श स्थल है। यहां हर पत्थर, हर स्तंभ, हर कोना—सदियों पुरानी कला, श्रद्धा और समर्पण की कहानी सुनाता है।