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राजस्थान की ऐतिहासिक हवेली जिसे डिजाइन करने में लगे थे 30 साल, वीडियो में देखिये इसके निर्माण की रहस्यमयी गाथा 

 

राजस्थान का लगभग हर शहर किसी न किसी किले, महल, इमारत और हवेली के लिए न केवल भारत में बल्कि विश्व पटल पर भी प्रसिद्ध है। हवा महल, जैसलमेर किला, लेख पैलेस, आगरा किला, सिटी पैलेस आदि मध्यकाल में बनी हजारों इमारतें प्रसिद्ध हैं। इन सभी किलों, इमारतों और हवेलियों आदि को देखने के लिए हर महीने लाखों पर्यटक इस ऐतिहासिक राज्य में पहुंचते हैं।

<a href=https://youtube.com/embed/uAoTpo3nsb0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/uAoTpo3nsb0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Patwon Ki Haveli Jaisalmer | पटवों की हवेली जैसलमेर का इतिहास, संरचना, कब-किसने बनवाई और कैसे पहुंचे" width="695">
राजस्थान का जैसलमेर कई ऐतिहासिक किलों, महलों और मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। लेकिन, आज हम इस लेख में जिस चीज का जिक्र करने जा रहे हैं, उसे 'पटवों की हवेली' कहते हैं। यह हवेली राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल है। कहा जाता है कि अकेले हवेली को डिजाइन करने में ही करीब 30 साल लग गए थे, तो आइए इस हवेली के बारे में विस्तार से जानते हैं।

पटवों की हवेली का इतिहास
जैसलमेर में मौजूद यह ऐतिहासिक हवेली सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक है। आपको बता दें कि पटवों की हवेली पांच हवेलियों का एक समूह है जिसे एक अमीर व्यापारी 'पटवा' ने बनवाया था। कहा जाता है कि व्यापारी के पांच बेटे थे और हर हवेली उन्हीं पांच बेटों के लिए बनाई गई थी। कहा जाता है कि इस हवेली को डिजाइन करने में तीस साल लगे और इसे बनाने में भी करीब तीस साल लगे, यानी इन पांचों हवेलियों को बनाने में 60 साल से भी ज्यादा का समय लगा।

पटवों की हवेली से जुड़े रोचक तथ्य
पांच हवेलियों से बनी पटवों की हवेली जैसलमेर शहर में अपनी तरह की सबसे अद्भुत और सबसे बड़ी हवेली है।
पहली हवेली, जिसे कोठारी की पटवा हवेली के नाम से जाना जाता है, पांचों हवेलियों में सबसे प्रमुख हवेली है। पहली हवेली का निर्माण प्रसिद्ध जौहरी गुमान चंद पटवा ने करवाया था। (विश्व प्रसिद्ध लोहागढ़ किला)
स्थानीय लोगों के अनुसार, पटवा ने सोने-चांदी के साथ-साथ अफीम की तस्करी करके खूब पैसा कमाया, जिसके बाद उसी पैसे से इस हवेली का निर्माण किया गया।
इन हवेलियों के अंदर मेहराब और प्रवेश द्वार बेहद खास तरीके से बनाए गए हैं। हर हवेली में शीशे के काम और पेंटिंग की एक अलग शैली है।
कहा जाता है कि पटवों के पांचों भाइयों और उनके परिवारों के लिए एक अलग हवेली थी और सभी हवेलियों में बेहतरीन सुविधाएँ थीं।
हवेली के अंदर एक संग्रहालय है, जिसमें कलाकृतियाँ, पेंटिंग और शिल्प संरक्षित हैं।

हवेली की वास्तुकला
इस हवेली की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। सबसे खास बात यह है कि इसकी दीवार पर शीशों से काम किया गया है। दीवारों पर बेहतरीन पेंटिंग और बारीक नक्काशी है। 60 से ज़्यादा बालकनियों में मौजूद खंभों पर अलग-अलग पेंटिंग हैं। इस हवेली का लगभग हर दरवाज़ा बेहतरीन डिज़ाइन से भरा हुआ है, जो वास्तुकला के किसी चमत्कार से कम नहीं है। खिड़कियों, मेहराबों, बालकनियों और प्रवेश द्वार पर भी जटिल नक्काशी और पेंटिंग हैं। (जमाली कमाली मकबरा)

पटवों की हवेली घूमने का समय
आप सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच कभी भी पटवों की हवेली घूमने जा सकते हैं। पटवों की हवेली में प्रवेश शुल्क लगभग 20 रुपये प्रति व्यक्ति है और अगर आप कैमरा ले जाना चाहते हैं तो उसका चार्ज अलग से है। जैसलमेर और इसके पर्यटन स्थलों पर जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का महीना माना जाता है। इस हवेली के आसपास स्थित होटलों में आप दाल बाटी चूरमा, मुर्ग-ए-सब्ज़, मसाला रायता आदि पारंपरिक भोजन का आनंद ले सकते हैं।