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60 साल में बनी राजस्थान की वो ऐतिहासिक हवेली जहाँ छिपे हैं सैंकड़ों साल पुराने राज, वीडियो में जानिए यहां घूमने का सही समय और किराया 

 

राजस्थान का जैसलमेर कई ऐतिहासिक किलों, महलों और मंदिरों के लिए भी मशहूर है। लेकिन, आज हम इस लेख में जिस चीज़ का ज़िक्र करने जा रहे हैं, उसे 'पटवों की हवेली' कहते हैं। यह हवेली राजस्थान का एक प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल है। कहा जाता है कि हवेली को डिज़ाइन करने में करीब 30 साल लगे थे, तो चलिए इस हवेली के बारे में विस्तार से जानते हैं।

<a href=https://youtube.com/embed/uAoTpo3nsb0?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/uAoTpo3nsb0/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden"" title="Patwon Ki Haveli Jaisalmer | पटवों की हवेली जैसलमेर का इतिहास, संरचना, कब-किसने बनवाई और कैसे पहुंचे" width="1250">
पटवा हवेली के अंदर के रोचक तथ्य
जैसलमेर में मौजूद यह ऐतिहासिक हवेली सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक है। आपको बता दें कि पटवों की हवेली पाँच हवेलियों का एक समूह है जिसका निर्माण एक अमीर व्यापारी 'पटवा' ने करवाया था। कहा जाता है कि व्यापारी के पाँच बेटे थे और प्रत्येक हवेली उन्हीं पाँच बेटों के लिए बनाई गई थी। कहा जाता है कि इस हवेली को डिज़ाइन करने में तीस साल और इसे बनाने में करीब तीस साल लगे थे, यानी इन पाँचों हवेलियों को बनाने में 60 साल से भी ज़्यादा का समय लगा था।

पटवों की हवेली से जुड़े रोचक तथ्य
पांच हवेलियों से मिलकर बनी पटवों की हवेली जैसलमेर शहर में अपनी तरह की सबसे अद्भुत और सबसे बड़ी हवेली है।
पहली हवेली, जिसे कोठारी की पटवा हवेली के नाम से जाना जाता है, पांच हवेलियों में सबसे प्रमुख हवेली है। पहली हवेली का निर्माण प्रसिद्ध जौहरी गुमान चंद पटवा ने करवाया था। (विश्व प्रसिद्ध लोहागढ़ किला)
स्थानीय लोगों के अनुसार, पटवा ने सोने-चांदी के साथ-साथ अफीम की तस्करी करके बहुत पैसा कमाया था, जिसके बाद उसी पैसे से इस हवेली का निर्माण किया गया।
इन हवेलियों के अंदर मेहराब और प्रवेश द्वार बहुत ही खास तरीके से बनाए गए हैं। हर हवेली में शीशे के काम और पेंटिंग की एक अलग शैली है।
कहा जाता है कि पटवों के पांचों भाइयों और उनके परिवारों के लिए एक अलग हवेली थी और सभी हवेलियों में बेहतरीन सुविधाएं थीं।
हवेली के अंदर एक संग्रहालय है, जिसमें कलाकृतियां, पेंटिंग और शिल्प संरक्षित हैं।

हवेली की वास्तुकला
इस हवेली की वास्तुकला बेहद अद्भुत है। सबसे खास बात यह है कि इसकी दीवारें शीशे के काम से बनी हैं। दीवारों पर बेहतरीन पेंटिंग और बारीक नक्काशी है। 60 से ज़्यादा बालकनियों में मौजूद खंभों पर अलग-अलग पेंटिंग हैं। इस हवेली का लगभग हर दरवाज़ा बेहतरीन डिज़ाइन से भरा हुआ है, जो वास्तुकला के किसी चमत्कार से कम नहीं है। खिड़कियों, मेहराबों, बालकनियों और प्रवेश द्वार पर भी जटिल नक्काशी और पेंटिंग हैं।

पटवों की हवेली घूमने का समय
आप सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच कभी भी पटवों की हवेली घूमने जा सकते हैं। पटवों की हवेली में प्रवेश शुल्क लगभग 20 रुपये प्रति व्यक्ति है और अगर आप कैमरा ले जाना चाहते हैं तो उसका चार्ज अलग से है। जैसलमेर और इसके पर्यटन स्थलों पर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक का महीना माना जाता है। इस हवेली के आसपास मौजूद होटलों में आप पारंपरिक भोजन जैसे दाल बाटी चूरमा, मुर्ग-ए-सब्ज़, मसाला रायता आदि का आनंद ले सकते हैं।