×

गंगानहर से इंदिरा गांधी नहर तक, दो मिनट के वीडियो में जाने कैसे बनी राजस्थान की सबसे बड़ी जल परियोजना

 

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में पानी पहुंचाना कभी असंभव सा सपना माना जाता था। लेकिन दूरदर्शी सोच, मेहनत और इंजीनियरिंग के दम पर इस सपने को हकीकत में बदला गया। इसी सोच की शुरुआत गंगानहर से हुई, जिसने आगे चलकर देश की सबसे बड़ी नहर परियोजनाओं में शामिल इंदिरा गांधी नहर का रूप लिया।

रेगिस्तान में पानी पहुंचाने का सपना

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/qHQhc9DhMfY?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/qHQhc9DhMfY/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र लंबे समय तक पानी की भारी कमी से जूझता रहा। यहां खेती और जीवन दोनों बारिश पर निर्भर थे। बीकानेर रियासत के शासक महाराजा गंगासिंह ने इस समस्या को समझा और क्षेत्र में पानी पहुंचाने की योजना बनाई।उन्होंने सतलुज नदी के पानी को राजस्थान तक लाने का सपना देखा। उस समय आधुनिक तकनीक और मशीनों का अभाव था, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और इंजीनियरिंग कौशल के बल पर इस विशाल परियोजना को आगे बढ़ाया गया।

कैसे बनी गंगानहर?

गंगानहर का निर्माण 20वीं सदी की शुरुआत में शुरू हुआ। पंजाब के हरिके क्षेत्र से पानी लाकर राजस्थान के सूखे इलाकों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई।उस समय न तो आज जैसी मशीनें थीं और न ही आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक। मजदूरों, स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक इंजीनियरिंग तरीकों की मदद से लंबी नहर का निर्माण किया गया।यह परियोजना उस दौर की बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिनी गई।

गंगानहर ने बदली श्रीगंगानगर की तस्वीर

गंगानहर के आने से राजस्थान के उत्तरी हिस्से में बड़ा बदलाव आया। जहां कभी रेगिस्तान और सूखा दिखाई देता था, वहां खेत लहलहाने लगे।श्रीगंगानगर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि का तेजी से विकास हुआ। इसी कारण इस क्षेत्र को राजस्थान का "अन्न भंडार" भी कहा जाने लगा।

गंगानहर से इंदिरा गांधी नहर तक

गंगानहर की सफलता ने राजस्थान में बड़े स्तर पर जल परियोजनाओं का रास्ता खोला। बाद में इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान नहर परियोजना शुरू की गई, जिसे वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में इंदिरा गांधी नहर परियोजना नाम दिया गया।यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के बड़े हिस्से तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित की गई।

बिना आधुनिक तकनीक के ऐतिहासिक निर्माण

आज के समय में बड़े बांध और नहर बनाने के लिए अत्याधुनिक मशीनों और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल होता है। लेकिन गंगानहर के निर्माण के समय सीमित संसाधनों के बावजूद हजारों लोगों की मेहनत से यह काम पूरा किया गया।यह परियोजना उस दौर की मानवीय क्षमता, योजना और दृढ़ संकल्प का उदाहरण मानी जाती है।

राजस्थान के लिए जीवनरेखा

इंदिरा गांधी नहर ने पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में पीने के पानी, सिंचाई और विकास की संभावनाओं को बढ़ाया। रेगिस्तान के बड़े हिस्से में हरियाली लाने वाली इस परियोजना ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया।